इस स्टडी में उन मरीजों को शामिल किया गया, जिनमें कोरोना के लक्षण नहीं थे और जिनमें हल्का बुखार था। गंभीर मरीजों को स्टडी में शामिल करने की अनुमति नहीं मिली थी। इस शोध में इंटरनल मेडिसिन के डॉ. पंकज मल्होत्रा की भी भूमिका अहम रही है।
कुछ इस तरह से दी गई विटामिन डी की खुराक
शोधकर्ताओं के मुताबिक कुछ स्टडीज में देखा गया था कि जुकाम व फ्लू से लड़ने में विटामिन डी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शोध में शामिल मरीजों को रोज 60 हजार यूनिट विटामिन डी दिया गया। साथ ही यह तय किया गया कि इन मरीजों में विटामिन डी की मात्रा 50 नैनोग्राम तक ले जाना है, जबकि कमजोर हड्डी वाले मरीजों में विटामिन डी का स्तर 30 नैनोग्राम रखते हैं।
विटामिन डी वाले मरीजों में यह भी देखा गया कि मरीजों में रक्त जमने की प्रक्रिया कम थी। यह कितना कम था, इस बारे में फिलहाल नहीं देखा गया। कोरोना के कई मरीजों में रक्त का थक्का जमने (क्लॉटिंग) की बात पहले से सामने आ चुकी है।
इटली में विटामिन डी को लेकर स्टडी हुई थी, जिसमें पाया गया कि विटामिन डी की सही मात्रा में खुराक लेने से मरीज की जान बचती है और वेंटिलेटर से जल्दी बाहर आता है। यह देखा गया कि मजबूत और स्वस्थ्य हड्डियों, दांत और मांसपेशियों के लिए विटामिन डी बहुत जरूरी है। इसकी कमी से हड्डियां कमजोर होती हैं और कई बीमारी घेर लेती हैं।
शोधकर्ताओं ने यह भी कहा है कि विटामिन डी से शरीर में रोग प्रतिरोधी क्षमता प्रभावी रहती है और इससे संक्रमण से लड़ने में मदद मिलती है। कुछ स्टडी का यह भी कहना है कि शरीर में विटामिन डी की पर्याप्त उपलब्धता से सामान्य जुकाम और फ्लू से बचा जा सकता है।
हमने पाया है कि विटामिन डी का डोज कोरोना मरीजों को जल्दी ठीक करने में सहायक बना है। विटामिन डी का शरीर की इम्युनिटी मजबूत बनाने में अहम रोल है। लोगों को भी चाहिए वे अपने खान-पान का ध्यान रखें। विटामिन डी की कमी न होने दें। यदि कमी है तो डॉक्टर से तत्काल संपर्क करें। बिना डॉक्टरी परामर्श के कोई भी दवा न लें। - डॉ. आशु रस्तोगी, असिस्टेंट प्रोफेसर एंडोक्राइनोलाजी डिपार्टमेंट, पीजीआई