कॉलेज कैडर के सहायक प्रोफेसरों ने 25 मई को आयोजित होने वाले लोकसभा चुनाव में ड्यूटी लगाते हुए प्रोटोकॉल व वरिष्ठता का उल्लंघन करने का चुनाव आयोग पर आरोप लगाते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है।
करनाल निवासी अनिल कुमार व अन्य 46 ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि जिला प्रशासन ने उन्हें पीठासीन अधिकारी के रूप में चुनाव ड्यूटी सौंपी है, जबकि उनसे कनिष्ठ और कम वेतनमान पाने वाले अधिकारियों को सेक्टर पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया गया है।
इस प्रकार याचिकाकर्ताओं को अपने कनिष्ठ अधिकारियों के अधीन चुनाव ड्यूटी करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने 20 अप्रैल को अधिकारियों को मांग पत्र दिया था लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। भारतीय चुनाव आयोग ने सभी जिला चुनाव अधिकारियों को निर्देशों का सख्ती से पालन करने और अधिकारियों की वरिष्ठता और पदनाम के अनुसार चुनाव ड्यूटी सौंपने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ताओं ने 18 अप्रैल के उस आदेश को रद्द करने की मांग की है जिसके तहत वरिष्ठ और उच्च वेतनमान पाने वाले याचिकाकर्ताओं को पीठासीन अधिकारी के रूप में, जबकि जूनियर और कम वेतनमान पाने वाले अधिकारियों को सेक्टर सुपरवाइजर के रूप में नियुक्त किया गया है।
याचिका में मांग की गई है कि उन्हें उनसे जूनियर अधिकारी के अधीन ड्यूटी पर न लगाया जाए। कॉलेजों में कार्यरत सहायक प्रोफेसरों को क्लास वन राजपत्रित अधिकारी का दर्जा है और उन्हें क्लास 2 अधिकारियों के अधीन लगाया जा रहा है।