यूटी के कई सरकारी स्कूलों में सफाईकर्मी की नौकरी लगवाने का झांसा देकर रामदरबार निवासी ठेकेदार ने करीब 400 लोगों से डेढ़ करोड़ रुपये ठग लिए। सभी पीड़ित कई महीने से सरकारी स्कूलों में काम भी कर रहे थे। वेतन नहीं मिलने पर इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। खास बात यह है कि यह पूरा फर्जीवाड़ा स्कूल के प्रधानाचार्यों की नाक के नीचे हुआ। गुस्साए लोगों ने बुधवार सुबह सारंगपुर थाने का घेराव किया और शिक्षा विभाग व प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की। हरकत में आई पुलिस ने आरोपी ठेकेदार के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
धनास की ईडब्ल्यूएस कॉलोनी निवासी महिलाओं ने बताया कि करीब पांच महीने पहले उनकी मुलाकात रामदरबार निवासी ठेकेदार राजीव उर्फ राजू उर्फ राजेश से हुई थी। उसने बताया कि उसे चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में सफाईकर्मियों की भर्ती का टेंडर मिला है। इसके लिए उसे 300 से 400 लोगों की जरूरत है। नौकरी पर लगवाने के लिए उसने उनसे 40-40 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। नौकरी के नाम पर लोगों ने ठेकेदार राजीव को पैसे दे दिए। कुछ ने गूगल पे, फोन पे तो कुछ ने नकद पैसे दिए। इसके बाद उसने लोगों को स्कूलों में सफाईकर्मी के तौर पर रखवा दिया। तीन से चार महीने तक काम करने के बाद जब लोगों को वेतन नहीं मिला तो उन्होंने ठेकेदार से बात की लेकिन उसने वेतन देने से पल्ला झाड़ लिया। स्कूल के प्रधानाचार्यों ने भी कह दिया कि इसमें उनका कोई रोल नहीं है। वेतन ठेकेदार ही देगा।
गुस्साए पीड़ित बुधवार सुबह बड़ी संख्या में वार्ड नंबर-15 के पार्षद के पास पहुंचे और उन्हें फर्जीवाड़े से अवगत करवाया। जांच की गई तो पता चला कि ठेकेदार के पास स्कूलों की सफाई से संबंधित कोई ठेका ही नहीं है। इसके बाद भीड़ सारंगपुर थाने पहुंची और शिक्षा विभाग के अधिकारियों व ठेकेदार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। लोगों ने बताया कि कुछ लोगों को ठेकेदार ने चार महीने के बजाय केवल आठ से 10 हजार रुपये वेतन के दिए हैं जबकि उन्हें 18 हजार वेतन बताया गया था। इसके अलावा नौकरी करने वालों को ग्रे कलर की ड्रेस डालकर स्कूल में आने की हिदायत दी गई थी, जिसके लिए उन्हें खुद के पैसों से ड्रेस सिलवानी पड़ी। करीब 188 लोगों ने ठेकेदार के खिलाफ पुलिस को लिखित शिकायत दी, जिसके आधार पर केस दर्ज किया गया।
प्रधानाचार्यों ने भी नहीं किया सत्यापन
ठेकेदार ने पहले ही यूटी के अधिकतर सरकारी स्कूलों में खुद ही जाकर प्रधानाचार्यों से मुलाकात कर ली थी और खुद को दिल्ली की एक एनजीओ का सदस्य बताते हुए कहा था कि उसे सरकार की ओर से चंडीगढ़ के स्कूलों में साफ-सफाई की जिम्मेदारी मिली है। इसके लिए स्कूलों को उसे एक भी पैसा भी नहीं देना होगा। स्कूलों में मुफ्त में सफाई करने के लिए कर्मचारी मिलने पर प्रधानाचार्यों ने भी कुछ नहीं कहा। यहां तक कि उन्होंने शातिर ठेकेदार के दावे की पुष्टि भी कहीं से नहीं की। इसके बाद आरोपी ठेकेदार ने कई स्कूलों में उन लोगों को नौकरी पर भेजना शुरू कर दिया, जिनसे उसने 40-40 हजार रुपये लिए थे।
स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर भी उठ रहे सवाल, जांच शुरू
बुधवार को इस फर्जीवाड़े का खुलासा होते ही शिक्षा विभाग के अधिकारी भी हरकत में आ गए और जांच शुरू करवा दी। प्रारंभिक जांच में दस सरकारी स्कूलों की पहचान हुई है जहां अनधिकृत लोगों को नियुक्त किया गया था। जांच जारी है, स्कूलों की संख्या और बढ़ सकती है। जिन स्कूलों के प्रिंसिपल/प्रमुख प्रभारियों ने अनधिकृत और अज्ञात लोगों को स्कूलों में प्रवेश की अनुमति दी है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी क्योंकि इससे साफ जाहिर है कि स्कूलों में बिना किसी अधिकार या अनुमति के बच्चों व स्कूल स्टाफ की सुरक्षा से समझौता किया गया।
सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपलों की मिलीभगत व उनकी लापरवाही से ठेकेदार ने लोगों से 40-40 हजार रुपये लेकर इस ठगी को अंजाम दिया। शिकायत पर पुलिस ने ठेकेदार को गिरफ्तार कर लिया है। स्कूल प्रिंसिपलों ने बिना कोई दस्तावेज जांचे और बिना सत्यापन के स्कूल में सफाईकर्मियों को नौकरी पर रख लिया। इसमें कहीं न कहीं भ्रष्टाचार की बू आ रही है।
- रामचंद्र यादव, पार्षद वार्ड नंबर-15 धनास
इस मामले में ठेकेदार को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
- हरमिंद्रजीत सिंह, एसएचओ, सारंगपुर थाना
पुलिस मामले की जांच कर रही है। अभी करीब 10 स्कूलों के रिकॉर्ड सामने आए हैं, जहां अनधिकृत लोगों को नौकरी पर रखकर स्कूलों में बच्चों व स्टाफ की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया गया। उक्त स्कूलों के प्रिंसिपल व प्रमुख प्रभारियों के खिलाफ नियमानुसार विभागीय व कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- हरसुहिंदर पाल सिंह बराड़, स्कूल शिक्षा निदेशक, चंडीगढ़