अमृतसर में श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेकने के लिए जा रही एक लड़की को हरमंदिर साहिब परिक्रमा के गोल्डन प्लाजा द्वार पर तैनात सेवादार ने रोक दिया। लड़की के चेहरे पर तिरंगे का स्टिकर लगा था। यह लड़की वाघा बॉर्डर से रिट्रीट सेरेमनी देखकर वापस आई थी।
वाघा बॉर्डर पर रिट्रीट देखने वाले पर्यटकों को देशभक्ति की लहर के तहत चेहरे, माथे या शरीर के किसी भी हिस्से पर तिरंगा लगा लेते हैं। यह लड़की भी रविवार देर शाम रिट्रीट सेरेमनी देखकर जब श्री हरमंदिर साहिब माथा टेकने पहुंची तो उसे हरमंदिर साहिब की परिक्रमा में ही प्रवेश नहीं करने दिया। इसकी शिकायत उसने साथ खड़े एक हरियाणवी व्यक्ति से की। उसने सेवादार से पूछा तो सेवादार का जवाब था कि इसने अपने चेहरे पर तिरंगा झंडा लगाया है।
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इसी बात पर काफी हंगामा हुआ और लोगों ने सेवादार की इस बात का विरोध जताया। मामला एजीपीसी के पास पहुंचा। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के महासचिव गुरचरण सिंह गरेवाल ने कहा कि उनके ध्यान में भी यह मामला आया है। मामले को लेकर वीडियो भी वायरल हुई है और वायरल वीडियो भी एसजीपीसी के अधिकारियों के पास पहुंची है। उन्होंने कहा कि वह जांच कराएंगे कि वह व्यक्ति सच में सेवादार था या कोई और था। इसको लेकर पूछताछ भी की जाएगी। उन्होंने साफ कहा कि एसजीपीसी देश के तिरंगे झंडे का सम्मान करती है।
गरेवाल ने कहा कि यह एक सिख धर्मस्थल है। हर धार्मिक स्थान की अपनी मर्यादा होती है... हम सभी का स्वागत करते हैं... अगर किसी अधिकारी ने दुर्व्यवहार किया है तो हम क्षमा चाहते हैं। लड़की के चेहरे पर लगा झंडा हमारा राष्ट्रीय ध्वज नहीं था क्योंकि उसमें अशोक चक्र नहीं था। यह एक राजनीतिक झंडा हो सकता था।