सोमवार को मौड़ मंडी के बाबा विश्वकर्मा मंदिर में बम धमाके में जान गंवाने वाले लोगों के निमित्त सहज पाठ के भोग के बाद श्रद्धांजलि समागम करवाया गया। मौड़ बम कांड के पीड़ितों को उपचार के लिए भटक रहे पेंशनर भूपिंदर सिंह ने कहा कि इंसाफ तो मिलना दूर की बात, जिन घायलों का अभी तक उपचार चल रहा सरकार उनके उपचार का खर्च भी नहीं उठा रही है। घायलों का खुद खर्च किया गया पैसा भी उन्हें नहीं दिया जा रहा।
धमाके में उनका भतीजा जसकरण सिंह 80 फीसदी तक झुलस गया था, जिसके उपचार पर लाखों रुपये का खर्च आया लेकिन प्रशासन और सरकार ने कोई सहयोग नहीं दिया। जबकि जसकरण के माता-पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। अब उसका उपचार उसके चाचा-चाची करवा रहे हैं।
जिला प्रशासन को देता रहा पत्र लेकिन नहीं दी मदद
घायल जसकरण सिंह का कहना है कि उनका उपचार बठिंडा, फरीदकोट, लुधियाना के अलावा दिल्ली में चला। लाखों रुपये का खर्च आ चुका है और आगे भी लाखों खर्च होंगे। वह सहायता के लिए कई बार जिला प्रशासन और सरकार को पत्र लिख चुके हैं लेकिन किसी ने कोई सुनवाई नहीं की। जसकरण ने बताया कि वह गर्मी में घर से बाहर नहीं निकल सकता। अगर घर से बाहर आता हूं तो चमड़ी में जलन होती है। इस कारण वह कोई भी काम नहीं कर सकता है। मौड़ बम कांड को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियां बडे़-बडे़ दावे तो करती हैं लेकिन हकीकत में पीड़ितों के लिए कुछ नहीं करतीं। उसने मांग की है कि जिला पुलिस प्रशासन और सरकार बम धमाके के आरोपियों की पहचान कर जल्द सलाखों के पीछे भेजे।
सूत्रों से पता चला है कि आगामी दिनों में कांग्रेस अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी करेगी। पांच वर्ष के दौरान मौड़ बम धमाके के पीड़ितों को इंसाफ दिलाने में नाकाम रहीं कांग्रेस अब चुनावी घोषणा पत्र में मौड़ बम धमाके पर कोई बड़ा एलान कर सकती है। मौड़ मंडी से कांग्रेस प्रत्याशी मंजू बाला ने कहा कि वह चुनावी घोषणा पत्र कमेटी की सदस्य हैं। अब यह मामला पहल के आधार पर हल करवाया जाएगा।
उन्हें अफसोस है कि पांच वर्षों तक मामले के पीड़ितों को इंसाफ नहीं मिल पाया। मौड़ बम धमाका इंसाफ कमेटी के सदस्य देसराज ने कहा कि वह लगातार इंसाफ के लिए संघर्ष करते रहे लेकिन प्रदेश सरकार ने मौड़ बम धमाके के आरोपियों को अभी तक नहीं पकड़ा। इसके अलावा सरकार ने बम कांड के पीड़ितों को सरकारी नौकरी और कोई सहायता नहीं दी।
राजनीति की भेंट चढ़ा मौड़ बम कांड
मौड़ बम धमाके को पूरे पांच वर्ष हो चुके हैं लेकिन किसी भी राजनीतिक पार्टी ने पूरे पांच वर्ष इस मामले को विधानसभा में जोर-शोर से नहीं उठाया। अब जैसे ही चुनाव नजदीक आ रहे हैं तो सभी राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशी पीड़ितों को इंसाफ दिलाने का वादा कर रहे हैं। देसराज का कहना है कि यह मामला चुनाव के समय ही राजनीतिक दलों को याद आता है। इससे पहले वह पीड़ितों के लिए कुछ नहीं करते।