बचाव पक्ष की दलीलें थी कि राम रहीम का पहली बार 2007 में केस में सामने आया था। साथ ही किसी भी आरोपी की पहचान नहीं हुई थी। मामले की जांच डीएसपी सतीश डागर और डीआईजी एम नारायणन ने की थी। कोर्ट में केस को साबित करने के लिए एडवोकेट एचपीएस वर्मा ने कोई कसर नहीं छोड़ी।
खट्टा सिंह की गवाही अहम रही
गुरमीत राम रहीम के पूर्व ड्राइवर खट्टा सिंह ने गवाही में कहा था कि पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या करने के लिए डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम ने कृष्ण लाल, कुलदीप और निर्मल सिंह को आदेश दिया था। गुरमीत राम रहीम 23 अक्टूबर 2002 को जालंधर के एक सत्संग से वापस सिरसा पहुंचा तो उसे कृष्ण लाल ने अखबार दिखाया, जिसमें साध्वियों के यौन शोषण के बारे में खबर छपी थी।
खबर पढ़ते ही गुरमीत तिलमिला उठा। उसने मेरे सामने कृष्ण लाल, कुलदीप और निर्मल को आदेश दिया कि रामचंद्र छत्रपति को मौत के घाट उतार दो। 24 अक्टूबर 2002 को रामचंद्र छत्रपति को उसके घर के बाहर गोलियों से भून दिया गया था।
सीबीआई ने साबित किया किशनलाल की रिवाल्वर थी
सीबीआई ने चश्मदीदों के अलावा कोर्ट में यह भी साबित किया कि जिस रिवाल्वर से रामचंद्र को गोली मारी गई थी, वह आरोपी किशन लाल की लाइसेंसी रिवाल्वर थी। किशन लाल ने 23 अक्टूबर को यह रिवाल्वर आरोपी निर्मल सिंह और कुलदीप को दी थी। इस तथ्य को सीबीआई ने ब्लैस्टिक एक्सपर्ट से भी कोर्ट में साबित करवाया। एक्सपर्ट ने कोर्ट में बताया था कि गोली उसी रिवाल्वर से चली थी, जो कि किशन लाल के नाम पर रजिस्टर्ड थी।
खट्टा सिंह एक बार मामले में अपने बयान से मुकर गया था। राम रहीम को साध्वी यौन शोषण मामले में सजा होने के बाद एक बार फिर खट्टा सामने आया और उसने सीबीआई कोर्ट में अपने बयान दर्ज करवाए और अपना पुराना बयान दोहराया।
खट्टा सिंह ने कहा था कि वर्ष 2012 से 2018 तक वह डेरा प्रमुख के खिलाफ इसलिए सामने नहीं आया था, क्योंकि डेरा प्रमुख खुलेआम घूम रहा था। उसके परिवार को जान का खतरा था। खट्टा ने सीबीआइ अदालत में बताया था कि यदि वह डेरा प्रमुख के खिलाफ पहले बयान दे देता तो उसे और उसके बेटे को डेरा प्रमुख जान से मरवा सकता था। इसकी मुझे धमकियां मिली थीं।
विजय चिह्न दिखाकर अंशुल ने जाहिर की खुशी
पत्रकार रामचंद्र छत्रपति का बेटा अंशुल छत्रपति कोर्ट का फैसला आने के बाद वह अपनी खुशी को रोक नहीं पाया और बाहर आते ही विजय चिह्न दिखाकर खुशी का इजहार किया। अंशुल ने बताया कि जज भगवान के रूप में आए और वह आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा सुनाई।
इसी के साथ वह उन सभी लोगों का धन्यवाद करते हैं जो उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे। अंशुल ने गवाहों का भी आभार जताया है जिन्होंने कोर्ट के समक्ष मजबूती के साथ अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने कदम पीछे नहीं खींचे।
सीबीआई के वकील एचपीएस वर्मा ने कहा कि कोर्ट दोषियों को कम से कम उम्र कैद और अधिक से अधिक फांसी की सजा सुना सकती है। कोर्ट कहां सजा सुनाएगी इसकी जानकारी 17 जनवरी से पहले दे दी जाएगी। क्योंकि अभी पुलिस और प्रशासन की तरह से कुछ कानूनी प्रक्रिया को पूरा किया जाना है इसी के मद्देनजर कोर्ट ने सजा के लिए 17 तारीख सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि सजा पर बहस होना बाकी है।
ऐसी सजा मिले कि लोगों को नसीहत मिले
गुरमीत राम रहीम के ड्राइवर खट्टा सिंह ने कहा कि कोर्ट से वह ऐसी सजा की मांग करते हैं कि भविष्य में कोई व्यक्ति इस तरह की वारदात को अंजाम देने से पहले सौ बार सोचे। खट्टा सिंह ने कहा कि हत्या के बाद से आज तक कई तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। वह जिंदा हैं इसके लिए श्री दरबार साहिब अरदास करने के लिए जाएंगे।
क्या है मामला
24 अक्तूबर 2002 में सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति को घर के बाहर गोलियों से भून दिया गया था। जिसके बाद उसके बेटे अंशुल ने बताया कि उसके पिता लगातार डेरे में रह रही साध्वियों के साथ हुए यौन शोषण संबंधी खबरों को प्रकाशित कर रहे थे। जिससे डेरामुखी नाराज थे। इसलिए डेरामुखी के कहने पर ही उनके पिता की हत्या की गई। मामले की सीबीआई जांच शुरू हुई लंबी चली जांच के बाद यह मामला 2007 में सीबीआई कोर्ट में पहुंचा।