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वैलेंटाइन डे : प्रेम में धर्म की दीवार नहीं आई आड़े, आज हंसी-खुशी बिता रहे जिंदगी

Sun, 14 Feb 2021 04:15 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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एडवोकेट सरतेज सिंह नरूला और वंदना मोदगिल। - फोटो : अमर उजाला
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प्यार.. इसके बारे में क्या कहना। यह जब किसी से हो जाता है तो कुछ दिखाई नहीं देता। दिल का मामला है भाई... इसके आगे सबकुछ व्यर्थ। सबसे अधिक धर्म व जाति की दीवारें इसके आगे खड़ी होती हैं। ऐसे में परिवार को विश्वास में लेकर आगे बढ़ना और सपनों को साकार करना आसान नहीं हो पाता लेकिन यह सब मुमकिन कर दिखाया एडवोकेट सरतेज सिंह नरूला ने। 

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परिवार ने पूरा साथ दिया और उपनिदेशक शिक्षा एसजीपीसी वंदना मोदगिल से शादी की। आज जिंदगी खुशहाली से जी रहे हैं। उनके तीन बेटा-बेटियां हैं। वे कहते हैं कि प्रेम में धर्म की दीवार आड़े नहीं आई। दूसरे लोगों को भी मेरा यही संदेश है कि धर्म को कम महत्ता दें और मानवता देखें।

सिख समुदाय से आने वाले सेक्टर- 10 निवासी सरतेज सिंह नरूला पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय में सीनियर एडवोकेट हैं। साल 1987 में उनकी पढ़ाई पंजाब विश्वविद्यालय के लॉ विभाग से हुई। स्नातक की पढ़ाई के दौरान ही उनकी मुलाकात एमए मनोविज्ञान की छात्रा व हिंदू परिवार से ताल्लुक रखने वाली वंदना मोदगिल से हुई। धीरे-धीरे मुलाकातें प्यार में बदल गईं। 
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सभी दोस्तों में यही जोड़ा बच गया था और सबकी शादी हो चुकी थी। दोनों ने ही परिवार के सामने शादी का प्रस्ताव रखा। पहले डर था लेकिन परिवार ने इस प्रस्ताव पर कोई आपत्ति नहीं की और साल 1999 में शादी के बंधन में बंध गए। शादी के बाद न तो धर्म कभी आड़े आया और न ही रीति-रिवाज। धर्म के बजाए एक दूसरे को महत्व दिया। हफ्ते में दो दिन एक साथ गुरुद्वारे जाते हैं और मंदिर भी।

धर्म मार्ग दिखाता है न कि रुकावटें पैदा करता है
शादी के बाद सरतेज सिंह नरूला हाईकोर्ट में एडवोकेट बन गए और वंदना मोदगिल शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी एसजीपीसी में उप निदेशक एजुकेशन बन गईं। 100 से अधिक स्कूलों का संचालन उनके निर्देशन में हो रहा है। आज उनके तीन बच्चे हैं। बड़ी बेटी हिताली, गुनांश सिंह व बेटा शहराज सिंह हैं। एडवोकेट सरतेज सिंह नरूला कहते हैं कि धर्म किसी भी काम में आड़े नहीं आता। धर्म का सीधा मार्ग दिखाता है न कि रूकावटें पैदा करता है। बस, इसे समझने की जरूरत है।

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