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Chandigarh News: यूटी पावरमेन यूनियन ने जताई आपत्ति

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चंडीगढ़। प्रशासन के बिजली विभाग से निजी कंपनी सीपीडीएल में बिना विकल्प भेजे गए कर्मचारियों को बिजली पूल के मकान आवंटित न किए जाने पर यूटी पावरमेन यूनियन ने कड़ी आपत्ति जताई है। यूनियन ने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग उठाई है। यूनियन के प्रधान अमरीक सिंह और महासचिव गोपाल दत्त जोशी ने आरोप लगाया कि 27 मार्च 2026 को 51 और 30 मार्च 2026 को 10 मकान बिजली कर्मचारियों को देने के बजाय रातोंरात इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को आवंटित कर दिए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि एक साल से अधिक समय से खाली पड़े मकानों को बिना तय प्रक्रिया के अचानक कैसे अलॉट कर दिया गया।
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यूनियन नेताओं का कहना है कि केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के स्टे के बावजूद जल्दबाजी में कब्जा दिया जा रहा है, जो न्यायालय की अवमानना है। उनका आरोप है कि गैरकानूनी तरीके से अलॉटमेंट कमेटी बनाकर यह प्रक्रिया पूरी की गई। यूनियन ने यह भी आरोप लगाया कि पहले कर्मचारियों का सरकारी दर्जा खत्म किया गया, जिससे उन्हें बैंक लोन, बच्चों के स्कूल में दाखिले और पासपोर्ट जैसी सुविधाओं से वंचित होना पड़ा। इसके बाद वीआरएस भी बंद कर दी गई। रिटायर कर्मचारियों को चार से 12 महीने तक पेंशन, ग्रेच्युटी और जीपीएफ का भुगतान नहीं किया जा रहा है, जबकि अवकाश के पैसे भी लंबित हैं। यूनियन ने प्रशासक से हस्तक्षेप कर गैरकानूनी अलॉटमेंट रद्द करने और संबंधित कमेटी को भंग करने की मांग की है।
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