परिवार के साथ प्रदीप सिंह।
पिता को बताया कि वह पास हो गया है तो पिता ने सबसे पहला सवाल पूछा कि कितना रैंक आया है। जिसपर प्रदीप ने सीधा जवाब नहीं दिया और कहा कि आपको मुझसे क्या उम्मीद थी। जिसपर पिता ने कहा कि उनको लगता है कि वह आईएएस बन जाएगा और उसकी इतनी रैंक जरूर होगी। जब प्रदीप सिंह ने पिता को बताया कि उसकी नंबर वन रैंक है तो पिता सुखबीर सिंह को खुद भी विश्वास नहीं हुआ। प्रदीप के पिता सुखबीर सिंह ने बताया कि वह चाहते थे कि उनका बेटा अच्छी रैंक लेकर आए, जिससे उसको हरियाणा कैडर मिल जाए। लेकिन उसने काफी मेहनत करके उम्मीद से कुछ ज्यादा ही उनको दिया है।
कविताएं लेखन व सामान्य विज्ञान में रुचि रखने वाले प्रदीप को आखिरी प्रयास में मिली सफलता
यूपीएससी टॉपर प्रदीप सिंह बताते हैं कि उनको कविताएं लिखना व सामान्य विज्ञान में रुचि है। वह कुछ समय कविता लेखन व सामान्य विज्ञान में बिताते थे। वहीं प्रदीप बताते हैं कि कई बार उनको लगता था कि उनका यह आखिरी प्रयास है और वह इस प्रयास में सफलता हासिल नहीं कर सके तो अपने पिता का सपना पूरा नहीं कर सकेंगे। इस तरह कई बार मायूसी भी होती थी तो वह कविता लेखन करने लगते थे या सामान्य विज्ञान पढ़ते है। इस तरह से मायूसी दूर होते ही दोबारा स्लेबस में जुट जाते थे।
प्रदीप के परिवार में जहां उनके पिता सुखबीर सिंह हैं जो पेशे से किसान हैं और दो बार 2000-2005 व 2010-2015 तक गांव के सरपंच रह चुके हैं। वहीं माता शीला देवी गृहणी हैं जो बेटे का परिणाम आने से पहले ही रक्षाबंधन का पर्व मनाने अपने मायके गई हुई थीं। प्रदीप के एक बड़े भाई अजित सिंह हैं जो बीटेक हैं और इस समय इंश्योरेंस कंपनी में बतौर सर्वेयर कार्यरत हैं। उनकी बहन मनीषा ने हाल ही एमएससी पूरी की है। प्रदीप की सफलता पर परिवार में खुशी का माहौल है।
2017 में सोनीपत की अनु कुमारी को मिला था दूसरा स्थान
सोनीपत के नाम पहले भी एक बड़ी उपलब्धि रही हैं। जिले के कई विद्यार्थी पिछले कुछ साल से लगातार यूपीएसी की परीक्षा उत्तीर्ण कर रहे हैं। यहां की रहने वाली अनु कुमारी ने वर्ष 2017 में देशभर में दूसरा स्थान प्राप्त किया था और महिलाओं में वह पहले स्थान पर रही थीं। अनु कुमारी ने यह उपलब्धि उस समय हासिल की थी, जब उनकी शादी हो चुकी थी और वह परिवार की जिम्मेदारी निभाने के साथ ही नौकरी करते हुए देश में दूसरे स्थान पर रही थीं।