यूपीएससी (संघ लोक सेवा आयोग) की परीक्षाओं में इस बार भिवानी जिले के परीक्षार्थियों का डंका बजा है। जिले के दो परीक्षार्थियों ने कठिन परिस्थितियों में भी इस प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता अर्जित की है। इस सफलता के पीछे हर किसी की अपनी कहानी है। परीक्षा पास कर चुके भावी अफसरों ने यूपीएससी की तैयारी कर रहे छात्रों को विशेष तौर पर टिप्स दिए हैं।
निजी कंपनी का मोटा पैकेज छोड़कर जनसेवा को बनाया उद्देश्य
देशभर में 463 वीं रैंक हासिल करने वाले सुनील श्योराण की स्कूली शिक्षा आर्य स्कूल डिगावा स्कूल में हुई। उसके बाद पॉलीटेक्निक गवर्नमेंट लोहारू से की फिर इसके बाद इन्होंने राजस्थान से बीटेक किया। सुनील दो भाई और एक बहन है। इनके पिता खेतीबाड़ी करते थे। जबकि सुनील के बड़े भाई सैनिक स्कूल कुंजपुरा में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
आईटी कंपनी की नौकरी छोड़ पास की यूपीएससी परीक्षा
मनीष रणवा मोरका गांव के रहने वाले हैं। यह दो भाई हैं। इनके पिता भी खेतीबाड़ी करते हैं। इनका बड़ा भाई वीरेंद्र इनकम टैक्स सूरत में कार्यरत हैं। मनीष ने मैट्रिक की परीक्षा बीआरसीएम पब्लिक स्कूल बहल से की। जबकि 12वी झुंझुनू एकेडमी से की। इसके बाद इन्होंने कोटा में कोचिंग ली और आईआईटी रुड़की से बीटेक की परीक्षा पास की।
बीटेक करने के उपरांत साल भर आईटी कंपनी गुड़गांव में नौकरी की। नौकरी से इनका मन नहीं लगा, ये कुछ बड़ा बनना चाहते थे। मनीष ने नौकरी छोड़ यूपीएससी की तैयारी दिल्ली से की। मेहनत रंग लाई और यूपीएससी परीक्षा में देश भर में 604 रैंक हासिल की।