कॉलेज में पढ़ते हुए मैं एक एनजीओ चलाती थी और कॉलेज खत्म करने के बाद ब्रेस्ट कैंसर के लिए महिलाओं को जागरुक करने का भी काम किया है। मेरा कोई एक प्रेरणास्रोत नहीं रहा है, सिवाय मेरे माता-पिता के, जिन्होंने मुझ पर विश्वास किया और पहली असफलता के बाद उनका साथ बना रहा। उन्होंने मेरे खाने-पीने से लेकर मेरे हर काम में पूरा सहयोग दिया है।
उन्होंने बताया कि परिवार में हम पांच लोग हैं। पिता गुरिंदर सिंह वालिया ज्वाइंट डायरेक्टर ऑफ पंजाब एनिमल हस्बेंडरी डिपार्टमेंट फतेहगढ़ साहिब में एडिशनल चार्ज ऑफ हेडक्वार्टर हैं। वहीं मां नवनीत वालिया भी पूर्व प्राध्यापक रह चुकी हैं। मेरी बड़ी बहन अमेरिका में रहती है और छोटा भाई इंजीनियरिंग कर रहा है। स्कूल और कॉलेज के समय मैं हमेशा ही भाषण प्रतियोगिता और सामाजिक मुद्दों को लेकर आगे रहीं हूं।
समाज में बदलाव लाने की चाहत
मैं एक मजबूत दिल वाली हूं और हर हालात से लड़ सकती हूं। लेकिन मैं अपने दायरे को बढ़ाना चाहती थी। इस कारण मैंने संघ लोक सेवा आयोग में जाने की सोचा। जहां मुझे भारत के हर कोने को जानने का मौका मिलेगा। जैसे कोरोना वायरस ने जहां हर किसी को एक नाव में सवार कर दिया है, वहीं ऐसे लॉकडाउन के दौर में मेरा मानना है कि हमें उन लोगों को ही अपने पास रखना चाहिए जो आपको पॉजिटिव बनाए रखते हैं और कोई बुरा ख्याल नहीं आने देते। एक ऑफिसर बनने के बाद मैं लोगों की सेहत और सुरक्षा को मजबूत बनाउंगी।
टॉपर के टिप्स
दर्पण ने बताया कि एक डॉक्टर होने के नाते मैं चाहूंगी कि जो भी संघ लोक सेवा आयोग की तैयारी में जुटे हैं और जिन्होंने इन परीक्षाओं की अभी तैयारी ही शुरू की है, उनको दिन में 5-6 घंटे ही पढ़ना चाहिए। उन सभी विद्यार्थियों को मेहनत करते रहना चाहिए जो गो विद फ्लो... का फंडा अपना रहे हैं। मैंने घुड़सवारी से सीखा है कि जैसे घोडे़ को ब्लाइंड फोल्ड पहनाया जाता है। वैसे ही हमें भी तैयारी करने के लिए हर समय फोकस करना चाहिए।