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एलपीयू में बवाल : तोड़फोड़-आगजनी, पुलिस-छात्रों में भिड़ंत, लाठीचार्ज, डीआईजी-एसएसपी की गाड़ियां तोड़ीं

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रात दो बजे कथित दुष्कर्म और आत्महत्या का वीडियो वायरल होने पर भड़का गुस्सा
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विश्वविद्यालय में 10 दिन के लिए छुट्टी, छात्रों को घर जाने के लिए कहा
अमर उजाला ब्यूरो
जालंधर। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में कथित दुष्कर्म और एक छात्रा की आत्महत्या की खबर को लेकर शनिवार रात शुरू हुआ बवाल रविवार देर रात तक जारी रहा। रातभर तोड़फोड़ और आगजनी के बाद छात्रों ने जालंधर-फगवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर दिया।
शाम को एक बार फिर विश्वविद्यालय के बाहर छात्रों और पुलिस के बीच भिड़ंत हो गई। पुलिस के लाठीचार्ज के बाद हालात तेजी से बिगड़ गए। छात्रों ने पुलिस पर पथराव किया और पुलिस की गाड़ियों को निशाना बनाकर तोड़फोड़ शुरू कर दी। जालंधर रेंज के डीआईजी नवीन सिंगला और एसएसपी की गाड़ियां भी क्षतिग्रस्त कर दी गईं। कई अन्य पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ हुई और कई वाहनों में आग लगाए जाने की सूचना है। तनाव को देखते हुए 5 हजार से ज्यादा पुलिस कर्मी तैनात किए गए हैं। देर रात तक हाईवे जाम था। विवि में छात्रों की 10 दिन के लिए छुट्टी कर गई है।
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टकराव में मीडिया से जुड़े वाहनों को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। घटनास्थल पर देर शाम तक भारी पुलिस बल तैनात रहा।
पुलिस छात्रों को समझाकर प्रदर्शन खत्म कराने का प्रयास कर रही थी। इसी दौरान छात्रों की ओर से बोतलें फेंके जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया। मौके पर मौजूद छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने लड़के-लड़कियों दोनों पर लाठियां बरसाईं। पुलिस कार्रवाई के बाद छात्र और उग्र हो गए और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़ हुई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को पीछे हटाने का प्रयास किया।
बवाल की शुरुआत सोशल मीडिया पर तेजी से फैले एक संदेश से हुई। छात्रों के बीच खबर फैली कि जी-3 गर्ल्स हॉस्टल में तीन-चार दिन पहले एक छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म हुआ। इसके बाद यह दावा भी फैल गया कि छात्रा ने आत्महत्या कर ली है। कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि हॉस्टल प्रबंधन को मामले की जानकारी दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

वायरल वीडियो और संदेशों ने छात्रों का गुस्सा और भड़का दिया। पुलिस के पास शुरुआत में इस घटना की पुष्टि का कोई सबूत या शिकायत नहीं थी। बाद में छात्रों की शिकायत के आधार पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ बीएनएस की धारा 64 में एफआईआर दर्ज की गई। रात करीब दो बजे बड़ी संख्या में छात्र विरोध के लिए एकजुट हुए। देखते-ही-देखते प्रदर्शन बेकाबू हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, छात्रों ने लाठियों से खिड़कियों के शीशे और कैंपस की दूसरी संपत्ति तोड़ी। ईंट-पत्थर और गमले भी फेंके गए। कई इमारतों और सामान में आग लगा दी गई। निजी सुरक्षा कर्मी भीड़ को रोकने में बेबस नजर आए। इसके बाद छात्र मुख्य गेट की ओर बढ़े और वहां लगे साइन बोर्डों को भी नुकसान पहुंचाया। तड़के करीब चार बजे प्रदर्शनकारी राष्ट्रीय राजमार्ग पर पहुंच गए और उसे अवरुद्ध कर दिया।

जांच के लिए एसपी, डीएसपी, महिला और छात्र प्रतिनिधियों की टीम गठित
जालंधर रेंज के डीआईजी नवीन सिंगला के अनुसार, छात्रों के बयानों के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित की गई है। इसमें फगवाड़ा के एसपी मेजर सिंह, डीएसपी पालविंदर सिंह, महिला पुलिस अधिकारी और छात्र प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। पुलिस के रिकॉर्ड में फिलहाल आरोपी और कथित पीड़िता, दोनों की पहचान स्पष्ट नहीं है।

हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें कार्रवाई की मांग पर अड़े छात्र
राष्ट्रीय राजमार्ग पर धरना लगने से जालंधर-फगवाड़ा मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। पुलिस का भारी बल कैंपस में पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। बाद में महिला पुलिस बल समेत बड़ी संख्या में जवान तैनात किए गए। पुलिस अधिकारियों ने छात्रों से बातचीत कर स्थिति शांत कराने की कोशिश की, लेकिन छात्र कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। सुबह एफआईआर दर्ज होने के बाद भी छात्रों ने उसकी प्रति मिलने तक प्रदर्शन जारी रखा। दोपहर बाद छात्रों ने दोबारा हाईवे पर धरना दिया, जिससे यातायात फिर बाधित हुआ। शाम को पुलिस के साथ हुई भिड़ंत, लाठीचार्ज और पथराव के बाद हालात एक बार फिर तनावपूर्ण हो गए।
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प्रबंधन ने दुष्कर्म-आत्महत्या की बात को खारिज किया
एलपीयू प्रशासन ने दुष्कर्म और छात्रा की मौत संबंधी दावों को पूरी तरह खारिज किया है। रजिस्ट्रार मोनिका गुलाटी ने इन्हें झूठा, निराधार और मनगढ़ंत बताते हुए कहा कि सोशल मीडिया के जरिये विश्वविद्यालय की छवि खराब की जा रही है। प्रशासन ने सभी से केवल आधिकारिक सूचना पर भरोसा करने की अपील की है।
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