पीजीआई परिसर में बेकार पड़ी वायर की बची हुई लकड़ी, मशीनों के लकड़ी के डिब्बे और अन्य अनुपयोगी सामग्री को फेंकने के बजाय दोबारा इस्तेमाल करने का निर्णय लिया। इन्हीं वस्तुओं से डाक घर की दीवारों पर आकर्षक वॉल तैयार की गई जिसने बिना किसी अतिरिक्त खर्च के पूरे कार्यालय का स्वरूप बदल दिया।
चंडीगढ़ पीजीआई परिसर में पुराने डाक घर को जब नेक्स्ट जेनरेशन पोस्ट ऑफिस का रूप दिया गया तो बदलाव सिर्फ आधुनिक तकनीक और डिजिटल सेवाओं तक सीमित नहीं रहा।
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इस परिवर्तन की सबसे खास बात रही कम खर्च में आकर्षक और मानवीय माहौल तैयार करने की सोच। पोस्ट मास्टर हिमांशु और पोस्टल असिस्टेंट संजीव ने सीमित संसाधनों में रचनात्मकता दिखाते हुए डाक घर के हर कोने को नया रूप दे दिया।
बेकार पड़ी चीजों से बदला स्वरूप
पीजीआई परिसर में बेकार पड़ी वायर की बची हुई लकड़ी, मशीनों के लकड़ी के डिब्बे और अन्य अनुपयोगी सामग्री को फेंकने के बजाय दोबारा इस्तेमाल करने का निर्णय लिया। इन्हीं वस्तुओं से डाक घर की दीवारों पर आकर्षक वॉल तैयार की गई जिसने बिना किसी अतिरिक्त खर्च के पूरे कार्यालय का स्वरूप बदल दिया। इसके अलावा बेकार पड़ी लकड़ी से बनाए गए डेकोरेटिव आइटम काउंटर, प्रतीक्षालय और प्रवेश द्वार को सादगी के साथ सुंदर बनाते हैं।
सजावट पर कोई खर्च नहीं
इस पूरी सजावट पर कोई बड़ा बजट खर्च नहीं किया गया बल्कि उपलब्ध सामग्री और व्यक्तिगत मेहनत से डाक घर को नया जीवन मिला। नेक्स्ट जेनरेशन पोस्ट ऑफिस के तहत जहां डिजिटल भुगतान, आधुनिक काउंटर और बेहतर सुविधाएं शुरू की गई हैं, वहीं यह रचनात्मक पहल यह भी दिखाती है कि सरकारी कार्यालय कम खर्च में भी आकर्षक और संवेदनशील बन सकते हैं। अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए यह डाक घर अब सिर्फ सेवा केंद्र नहीं बल्कि तनाव भरे माहौल में सुकून देने वाला स्थान बन गया है।