घग्घर नदी पर 28 किलोमीटर के दायरे में कोई पुल नहीं था तो इस क्षेत्र के बाशिंदों को नदी पार करने के लिए कई किलोमीटर का फेरा लगाना पड़ता था। 40 साल में कई सरकारें आईं और गईं, लोग पनिहारी में पुल बनवाने के लिए शासन-प्रशासन के चक्कर लगाते-लगाते थक गए, पुल नहीं बनना था सो नहीं बना।
बाबा भूमण शाह संघर साधा के गद्दीनशीन संत ब्रहमदास की प्रेरणा से लोगों ने चंदा जुटाकर करीब एक करोड़ की लागत से 220 फीट लंबा और 16 फीट चौड़ा पुल बना लिया। सरकार को आइना दिखाने वाले इस कदम से उत्साहित ग्रामीणों ने पुल का उद्घाटन किसी राजनेता या अधिकारी से न करवाकर बाबा ब्रह्मदास से ही करवाने का फैसला लिया है लेकिन खुद बाबा बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को गति देते हुए पुल का उद्घाटन किसी बेटी के हाथों कराना चाहते हैं।
डेरा बाबा भूमण शाह संघर साधा के गद्दीनशीन संत ब्रह्मदास महाराज ने कहा कि लोगों को सही रास्ता दिखाने की जरूरत है। अच्छे काम के लिए लोग आगे आते हैं। गांव मल्लेवाला व नेजाडेला कलां के बीच घग्घर नदी का पुल भी लोगों के प्रयास से बना था।
अब गांव पनिहारी में लोगों ने पुल बनाने का बीड़ा उठाया तो कार्य सिरे चढ़ गया।
उन्होंने बताया कि उद्घाटन के लिए संगत की ओर मुझे कहा जा रहा है पर मेरी इच्छा यह है कि छोटी बच्ची से इसका उद्घाटन करवाकर ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान को बढ़ावा दिया जाए। बाकी संगत जो चाहेगी उसी के अनुसार होगा। हमने उत्तर प्रदेश और उतराखंड में भी संगत को प्रेरित कर रास्तों में बने गड्ढों को भरवाने का काम किया है।
यह है पनिहारी में पुल बनने की कहानी
घग्घर नदी पर सिरसा से सरदूलगढ़ तक 28 किलोमीटर क्षेत्र में कोई पुल न होने के कारण दो दर्जन गांवों के लोगों को दूसरी और जाने के लिए या तो सिरसा से होकर जाना पड़ता था या फिर सरदूलगढ़ होकर।
गांव मल्लेवाला में 10 साल पहले कई गांवों के लोगों ने पुल बनवा लिया था। इसके बाद वर्ष 2010 में गांव झंडा खुर्द में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की और से पुल बनवाया गया।
पनिहारी इलाके में पुल न होने से इस बीच नदी पार करने के फेर में 15 लोग जान भी गंवा चुके थे। पिछले साल पनिहारी के दो बच्चों की नदी में डूबने से मौत हो गई। आजिज आकर लोगों ने खुद के दम पर पुल बनाने की ठान ली।
गांव मल्लेवाला में घग्घर पर पुल बनवा चुके डेरा बाबा भूमण शाह संघर साधा के गद्दीनशीन संत ब्रह्मदास का साथ मिला और लोग चंदा जुटाने में लग गए। किसी ने अपने बुढ़ापे की पेंशन दान दी तो किसी ने खेती-किसानी से आई पूरी की पूरी राशि। सैकड़ों लोगों ने श्रमदान किया। राजस्थान के इंजीनियर के निर्देशन में कुछ ही महीने में पुल बनकर लगभग तैयार हो चुका है।
पनिहारी में पुल बन जाने के बाद 28 किलो मीटर के क्षेत्र में घग्घर नदी पर पुलों की संख्या पांच हो जाएगी जिसमें तीन गैर सरकारी होंगे। पुल बन जाने से पनिहारी के अलावा भरोखां, दड़बी, रसूलपुर, ढाणी दिलबाग सिंह, अलीकां, किराड़कोट, बप्पां के ग्रामीणों को सीधे तौर पर लाभ होगा।
गांव के चमकोर सिंह और रामकिशन कहते हैं कि घग्घर नदी में डूबने से कई लोगों की मौत हो चुकी है। अब पुल बनने से इस प्रकार के हादसों पर अंकुश लगेगा। पनिहारी और आसपास के लोगों को आर-पार जाने में सुविधा होगी।
10 किलोमीटर का रास्ता होगा कम
पनिहारी गांव के पास घग्घर नदी पर पुल बनने से आसपास के गांवों के लोगों को नदी पार करने के लिए दस किलोमीटर का रास्ता कम तय करना पड़ेगा। इससे लोगों का समय भी बचेगा। नदी के किनारों पर रहने वाले लोगों के बच्चों को स्कूल जाने में भी आसानी होगी।
सरकार के आगे नहीं गिड़गिड़ाएंगे, सड़क भी खुद बना लेंगे
पुल के निर्माण में एक करोड़ रुपये का खर्च आया है। शासन-प्रशासन का सहयोग तो दूर कोई पुल की ओर झांकने तक नहीं आया। पुल के उद्घाटन पर किसी राजनेता या अधिकारी को नहीं बुलाएंगे।
40 वर्षों में हमारी मांग पर किसी ने सुनवाई नहीं की। पुल के दोनों और दो किलो मीटर का सड़क का टुकड़ा यदि सरकार बना दे तो ठीक नहीं तो जैसे पुल बनवाया है, उसी तरह सड़क बना लेंगे। मेजर सिंह एडवोकेट, कोषाध्यक्ष घग्घर पुल निर्माण समिति
पेंशन दी और श्रमदान भी किया
पुल निर्माण में मैंने अपनी बुढ़ापा पेंशन की राशि से भी चंदा दिया है। श्रमदान भी किया है। अब पुल बनकर तैयार हो गया है तो बहुत खुशी हो रही है। नदी के दूसरी ओर रहने वाले लोगों को पनिहारी बस अड्डे से चंड़ीगढ़ और लुधियाना की बस पकड़ने में सुविधा होगी। विद्यार्थियों को स्कूल आने-जाने में होने वाली दिक्कत भी दूर हो जाएगी। -लछमण सिंह, ग्रामीण
पुल निर्माण का शुभारंभ अगस्त 2014
पुल को चौड़ाई 16 फीट
पुल की लंबाई 220 फीट