शहर के मुख्य चौराहों पर ट्रैफिक की समस्या से जल्द निजात मिलने के आसर अभी नहीं दिख रहे हैं। छह साल से अटके अंडर पास प्रोजेक्ट के लिए अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
हालांकि इसके लिए इस वित्त वर्ष में केंद्र से पहले ही बजट मंजूर हो चुका है मगर प्रशासन के पास अब मेट्रो प्रोजेक्ट का बहाना है।
देरी का तर्क
प्रशासन ने अंडरपास का प्रोजेक्ट चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड को सौंपा था। बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि आठ अंडर पास में से जिन तीन के लिए प्रशासन से मंजूरी मिली, उनका निर्माण भी फिलहाल व्यावहारिक नहीं है।
ये चौराहे मेट्रो के रूट पर आ रहे हैं। ऐसे में इन्हें बनाना मुश्किल है। ये मेट्रो प्रोजेक्ट के चक्कर में चंडीगढ़ में छह सालों से अंडर पासों का निर्माण अटका हुआ है।
यूटी प्रशासन ने अंडर पास का काम चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड को सौंपा था। बोर्ड का कहना है कि अंडर पास के निर्माण में मेट्रो बाधा डाल रही है। जिन चौराहों पर अंडर पास बनाए जाने हैं, वहां से मेट्रो का भी रूट है।
ऐसे में इन चौराहों पर अंडर पास बनाना मुश्किल है। जिन तीन अंडर पासों के निर्माण को मंजूरी दी गई थी उनमें प्रेस चौक, ट्रांसपोर्ट चौक और पिकाडली चौक शामिल हैं।
अब दोबारा स्टडी
अब चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड अंडर पास के पूरे प्रोजेक्ट की ही फिर से स्टडी कर रहा है। प्रस्तावित तीन अंडर पास मेट्रो के रूट में आते हैं। इसलिए अंडर पास के लिए दोबारा स्टडी की जा रही है।
इसका प्लान यूटी प्रशासन को भेजा जाएगा। इनमें उन जगहों को चयनित किया जाएगा जहां ट्रैफिक की समस्या रहती हो और मेट्रो का भी रूट न हो।