पंजाब के जालंधर निवासी गुरप्रीत सिंह गोल्डी और कमलप्रीत सिंह अपने फॉर्म के जरिए खेती को रसायनों से बचाने में जुटा है। अक्सर हम घर में खाना बनाने के लिए चमकदार और बड़ी-बड़ी सब्जियां खरीद लाते हैं। हम इस बात से अनजान हैं कि ये चमकदार सब्जियां हमारे लिए नुकसानदायक सिद्ध हो सकती हैं। फलों व सब्जियों में इस्तेमाल हो रहे रसायन इनको जहरीला बना रहे हैं।
इस वजह से यह जहर धीरे-धीरे शरीर में दाखिल होकर कैंसर व अन्य घातक बीमारियों का कारण बन रहा है। पंजाब की कृषि को रसायन मुक्त करने के उद्देश्य से खालसा कुदरती खेती फार्म चलाया गया है। यह पूरी निष्ठा के साथ लोगों को कुदरती खेती की ओर मोड़ने में लगा हुआ है। जालंधर कैंट के पास गांव बंमियांवाल में बने इस फार्म में रसायन मुक्त खेती की जा रही है। इससे पैदा होने वाली फसल का इस्तेमाल करके लोग कैंसर व अन्य कई बीमारियां से बच सकते हैं।
इस फार्म में सब्जियों और फलों को कीड़ों से बचाने के लिए भी घरेलू तरीकों से तैयार पदार्थ का छिड़काव किया जाता है, जो फसल के लिए हानिकारक नहीं होता। इस खेती से किसानों को अवगत करवाने के लिए इस फार्म के गुरप्रीत सिंह गोल्डी, कमलप्रीत सिंह ने कई सेमिनार भी किए हैं। रसायन युक्त खेती से किडनी संबंधी बीमारियां भी बढ़ रही हैं।
इस समय जहरीले रसायन का उपयोग सब्जी का उत्पादन बढ़ाने व उसको खूबसूरत बनाने के लिए किया जा रहा है, लेकिन ऐसी सब्जियों व फलों का सेवन करके हम बीमारियों को दावत दे रहे हैं। जानकारों के मुताबिक इन रसायन युक्त सब्जियों व फलों के जरिये रोजाना 0.5 मिलीग्राम तक जहर इंसान के शरीर में जा रहा है। इसीलिए ओर्गेनिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।
कैसे हो रही है रसायन मुक्त कुदरती खेती
फार्म को चलाने वाले गुरप्रीत सिंह गोल्डी और कमलप्रीत सिंह का कहना है कि वे 47 एकड़ में बने फार्म में बिना रसायन के प्रयोग के बैंगन, लौकी, खीरा व अन्य कई तरह की सब्जियों और फलों की खेती कर रहे हैं। इस फार्म में फसलों पर छिड़काव के लिए कीटनाशक गाय के मूत्र, गोबर, गुड़ व अन्य कुछ चीजों को मिलाकर तैयार किया जाता है।
इसे मटके में भरकर 5-6 दिन तक सड़ने के लिए रखा जाता है। इससे इसमें जीवाणु कल्चर तैयार होता है। इस मटके में रखे पदार्थ को 200 लीटर पानी में मिलाकर किसी भी फसल में गीली या नमीयुक्त जमीन में फसलों की कतारों के बीच अच्छी तरह से छिड़काव किया जाता है। इससे रसायन मुक्त खेती करने में उनको मदद मिल रही है।
बैंगन पर होता है सबसे ज्यादा रसायन का इस्तेमाल
गुरप्रीत सिंह गोल्डी और कमलप्रीत सिंह कहना है कि बैंगन में रसायन का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। इसका कारण यह है कि इसमें कीड़े की सबसे ज्यादा मार पड़ती है। उन्होंने बताया कि वे बैंगन पर 1 प्रतिशत भी रसायन का इस्तेमाल नहीं करते हैं।
कुदरती खेती से तैयार इन सब्जियों को लोगों तक पहुंचाने के लिए उन्होंने होम डिलीवरी शुरू करने का मन बनाया है। उन्हाेंने कहा कि इस पर काम चल रहा है व जल्द ही वे उनकी तैयार फल और सब्जियां लोगों के घर तक पहुंचाएंगे।