पीयू अग्निकांड में साजिश की आशंका को यूजीसी की एक चिट्ठी ने और हवा दे दी है। यूजीसी ने एमएचआरडी को लेटर लिखा था कि उसे पीयू में कुछ गड़बड़ियों का संदेह है, ऐेसे में किसी स्वतंत्र एजेंसी से तीन साल का ऑडिट कराया जाए। यह लेटर सात अप्रैल को भेजा गया था। जबकि यूनिवर्सिटी के एडमिन ब्लॉक में आग 14 मई को लगी है। दूसरी ओर कमेटी अभी जांच में जुटी हुई है।
फंड की दिक्कत से जूझ रही पीयू ने यूजीसी को ग्रांट जारी करने केलिए कई बार कहा। यूजीसी ने जब पीयू का आय और व्यय का हिसाब मांगा गया तो पीयू ने पत्राचार से अपना पक्ष रख दिया। पीयू ने जो ब्योरा दिया, उस पर यूजीसी ने सवाल खड़े कर दिए। इसके बाद यूजीसी ने एमएचआरडी को लिखा कि पीयू का तीन साल का ऑडिट कराया जाए। पीयू ने यूजीसी से पहले कहा कि उनके पास 2609 नॉन टीचिंग स्टाफ है, जिसे अगले पांच साल में 1019 किया जाना है। दूसरी दफा दिए जवाब में कहा कि नॉन टीचिंग स्टाफ 4130 है, जिसे 3111 किया जाना है।
यूजीसी ने कहा कि यह आंकड़ा तय मानक के हिसाब से काफी ज्यादा है। इसकेअलावा पीयू की मौजूदा आय और भविष्य में इसकेस्तर पर भी यूजीसी ने एमएचआरडी को लिखे पत्र में संदेह जताया। वहीं पीयू की तरफ से पंजाब सरकार केसाथ ग्रांट के लिए सीधे संवाद और अन्य मसलों पर भी यूजीसी ने संदेह जताते हुए ऑडिट कराने की बात कही।