पंजाब में ड्रग्स महज एक फोन कॉल पर मिल जाती है। इधर आपने फोन किया और उधर घर पर पुड़िया पहुंच गई। बस डिलीवरी के साथ ही पैसे देने होते हैं। नशे के शिकार एक युवक ने वीरवार को सामाजिक न्याय और अधिकारिता स्थायी संसदीय समिति के समक्ष यह खुलाया किया।
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समिति ने वीरवार को पीजीआई के ड्रग डी-एडिक्शन सेंटर का दौरा किया। 22 सांसदों की टीम ने सेंटर की कार्यप्रणाली को समझा और नशे के शिकार युवाओं से विस्तार से बातचीत की। इस दौरान युवाओं ने जो बताया, उसे सुनकर सांसद दंग रह गए।
नवांशहर से आए एक 25 वर्षीय युवक ने सांसदों को बताया कि वह पिछले दो सालों से चिट्टा (स्मैक) का नशा कर रहा है। इसे खरीदने के लिए उसके पास रुपयों की कमी पड़ी तो वह गलत रास्ते पर निकल पड़ा।अब वह अपनी मर्जी से इलाज कराने आया है। जब सांसदों ने पूछा कि ड्रग कैसे मिलती है, तो उसका जवाब चौंका देने वाला था।
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युवक ने बताया कि वह फोन कॉल करता और घर पर ही नशा उपलब्ध हो जाता था। बस उन्हें रुपये देते ही ड्रग हाथ में आ जाती। बॉर्डर पार एरिया से आसानी से ड्रग मिल जाती है। जब पूछा गया कि वे कौन लोग हैं, जो घर पर ड्रग दे जाते हैं तो युवक ने कुछ भी बताने से मना कर दिया। उसने सिर्फ यही बताया कि घर के आसपास के लोग हैं।
‘आपको तो बॉलीवुड में होना चाहिए, यहां कैसे’
नशे में जिंदगी बर्बाद करती यूवा पीढ़ी
- फोटो : demo pics
22 वर्षीय एक स्मार्ट युवक को देखकर कमेटी के सदस्य काफी मायूस हुए। उन्होंने कहा कि आपको तो बॉलीवुड में होना चाहिए, यहां कैसे आ गए? उसने बताया कि वह चंडीगढ़ का रहने वाला है। न्यूजीलैंड से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में डिप्लोमा किया हुआ है, लेकिन अब वह हेरोइन का लती है। फर्राटेदार इंग्लिश बोलने वाले युवक को एक बार के नशे में चार से पांच हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। उसने बताया कि गलत संगत की वजह से वह नशे का आदी हो गया।
सेंटर बढ़ाने की सिफारिश करेंगे
समिति के सदस्यों ने बताया कि जिस प्रकार की समस्या है, उस हिसाब से ड्रग डी एडिक्शन सेंटर काफी छोटा है। मरीज हजारों में हैं, लेकिन बेड सिर्फ बीस। समिति सबसे पहले एडिक्शन सेंटर को तीन गुना बढ़ाने की सिफारिश करेगी ताकि मरीजों से नशे का सेवन छुड़वाने में मदद मिले। शराब और ड्रग एडिक्ट पेशेंट को अलग-अलग रखने की व्यवस्था करने की बात रखी जाएगी। साइक्रेट्री की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और उनकी सीटें बढ़ाने की भी सिफारिश की जाएगी।
ये सदस्य थे समिति में
संसद की सामाजिक न्याय व अधिकारिता की स्थायी संसदीय समिति के चेयरमैन रमेश बैंस, संतोख सिंह चौधरी, शेर सिंह, नीलम सोनकर, ममता ठाकुर, भारतेंदु सिंह, प्रोफेसर सीताराम सहित अन्य लोग शामिल थे। इस मौके पर पीजीआई डायरेक्टर योगेश कुमार चावला, डिप्टी मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. विपिन कौशल सहित ड्रग एडिक्शन सेंटर के कई डॉक्टर मौजूद रहे।
ड्रग सेंटर के युवाओं से बात करके पता चला कि समस्या काफी बड़ी और अस्पताल छोटा है। चेयरमैन भी इस बात से सहमत दिखे। हमारी पहली प्राथमिकता होगी कि जल्द से जल्द से इस सेंटर को बड़ा किया जाए, ताकि नशे के मरीजों को राहत मिल पाए।
- भारतेंदु सिंह, सांसद व सदस्य सामाजिक न्याय व अधिकारिता स्थायी संसदीय समिति
इस अस्पताल का इंफ्रास्ट्रक्चर काफी छोटा है। यहां पर मरीजों की भीड़ होती है। फैकल्टी भी कम है। इससे बढ़ाने की जरूरत है, तभी कोई समाधान हो पाएगा।
- नीलम सोनकर, सांसद व सदस्य सामाजिक न्याय व अधिकारिता की स्थायी संसदीय समिति
फोन पर ड्रग्स उपलब्ध करवाने की बात तो दूर, नींद की एक गोली मंगा कर दिखा दें। यह सब बेकार की बातें हैं। पंजाब में इतनी सख्ती है कि मेडिकल दुकान वाले भी डॉक्टर की स्लिप के बिना ऐसी दवाएं नहीं देते।
- सुरजीत कुमार ज्याणी, स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा मंत्री, पंजाब