अगर डायबिटीज होने के बाद यदि लापरवाही बरती गई तो किडनी फेल होने की संभावना बढ़ जाती है। इससे मरीज को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। एक तो इंसुलिन लेने के लिए पेट में लगने वाली सुइयों का दर्द और ऊपर से डायलिसिस। यदि इस स्थिति से बचना है तो टाइप वन डायबिटीज के मरीज को पांच साल बाद रेग्युलर यूरीन की जांच करवानी चाहिए।
इसके अलावा यूरीन में पीलापन, ज्यादा झाग, शरीर में सूजन, थकान जैसे लक्षण आते हैं तो तुरंत समझ लेना चाहिए किडनी में दिक्कतें शुरू हो गई हैं। इससे बचने के लिए इंसुलिन की समय पर और सही डोज लेनी जरूरी होती है। खान-पान संतुलित होना चाहिए। इंडोक्राइनोलॉजिस्ट की ओर से बताई गए प्रिस्क्रिप्शन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
पीजीआई में अब तक छह पेनक्रियाज ट्रांसप्लांट
पीजीआई के डिपार्टमेंट ऑफ रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी के मुताबिक अब तक छह से पेनिक्रयाज ट्रांसप्लांट हो चुके हैं। सभी पेनक्रियाज ट्रांसप्लांट किडनी के साथ किए गए हैं। डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुनील ने बताया कि पेनक्रियाज के साथ किडनी ट्रांसप्लांट के पीछे एक मकसद है।
दरअसल पेनक्रियाज में जब रिजेक्शन शुरू होती है तो उसके लक्षण सामने नहीं आते, जबकि किडनी के रिजेक्शन का पता मात्र एक ब्लड टेस्ट से पता चल जाता है। इसीलिए दोनों एक साथ ट्रांसप्लांट किए जाते हैं, ताकि रिजेक्शन हो तो उसका पता चल सके।
देश में एक लाख लोग टाइप वन डायबिटीज के मरीज
किडनी प्रत्यारोपण
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देश में एक लाख लोग टाइप वन डायबिटीज के मरीज
होटल जेडब्ल्यूए मैरियट में आयोजित पेनक्रियाज ट्रांसप्लांट की पहली सीएमई में आए विशेषज्ञों ने बताया कि पूरे देश में एक लाख लोग टाइप वन डायबिटीज से पीड़ित हैं। इन मरीजों में देखा जा रहा है कि वे शुगर कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं। इससे उनकी किडनी पर दिक्कत आ सकती है।
ऐसे में आने वाले समय में पेनक्रियाज ट्रांसप्लांट काफी अहम होगा। पेनक्रियाज ट्रांसप्लांट देश के सिर्फ छह सेंटरों में हो रहा है। इसमें दिल्ली, अहमदाबाद, हैदराबाद, चेन्नई, बंगलूरू और चंडीगढ़ शामिल है। बाकी जगहों पर पेनक्रियाज ट्रांसप्लांट का नामो-निशान नहीं है। इसका सीधा खामियाजा मरीजों को ही भुगतना पड़ रहा है।
जो आज हो रहा है, वह 20 साल पहले शुरू हो जाना चाहिए
पीजीआई के डिपार्टमेंट आफ रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी की ओर से फर्स्ट नेशनल सीएमई (कंटिन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन) का शुभारंभ शनिवार को सेक्टर-35 स्थित होटल जेडब्ल्यूए मैरियट में किया गया। इस मौके पर देश भर से सर्जन जुटे और अपने अनुभव साझा किए।
सभी विशेषज्ञों ने एक सुर में कहा कि ये कांफ्रेंस आज से 20 साल पहले शुरू होनी चाहिए थी। यदि ऐसा होता तो अब तक पेनक्रियाज ट्रांसप्लांट की कई गुत्थी सुलझ चुकी होती, जिसका सीधा फायदा मरीजों को मिलने वाला था। फिर भी अच्छी शुरुआत हुई है, इसका सभी को स्वागत करना चाहिए।
दो लाख लोगों को चाहिए आर्गन
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे नेशनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन के डायरेक्टर प्रोफेसर विमल भंडारी ने कहा कि देश में करीब दो लाख लोगों को आर्गन चाहिए। इनमें से सिर्फ दस हजार लोगों को ही मिल पा रहे हैं। हालांकि पिछले कुछ वर्षों के दौरान आर्गन डोनेशन के प्रति जागरूकता बढ़ी है। इसका पूरा श्रेय सरकार को दिया जाना चाहिए।
उन्होंने पीजीआई रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी के प्रोफेसर मिंज व डॉ. आशीष शर्मा को बधाई देते हुए कहा कि इन दोनों की वजह से पहली बार सर्जन पेनक्रियाज ट्रांसप्लांट के बारे में विचार-विमर्श करने के लिए इकट्ठा हुए हैं। इस मौके पर ऑक्सफोर्ड से डॉ. संजय सिन्हा व यूके मैनचेस्टर से डा. रमन ढांडा मौजूद रहे। इस मौके पर वह मरीज आए थे, जिनका पीजीआई ने किडनी के साथ पेनक्रियाज ट्रांसप्लांट किया है