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दो अंगदाताओं ने फिर 11 जिंदगियां कीं गुलजार

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चंडीगढ़। पीजीआई में एक बार फिर दो अंगदाताओं ने दुनिया से जाकर 11 जिंदगियों में खुशियां बिखेरी हैं। इस बार बिहार और पंजाब के एक-एक अंगदाताओं का पिछले दो दिनों के अंदर अंगदान कराया गया। इसमें चार किडनी, दो पैनक्रियाज, चार कार्निया और हृदय प्रत्यारोपित किया गया। पीजीआई में हृदय और एक पैनक्रियाज के मिलान का मरीज न मिलने पर उसे एयरलिफ्ट कर बाहर भेजा गया। इसमें डॉ. आरएमएल अस्पताल नई दिल्ली को हृदय और लीवर एसडीएम अस्पताल जयपुर में भर्ती मरीज को प्रत्यारोपित किया गया। गौरतलब है कि इससे पहले पीजीआई में 23 जुलाई से 14 अगस्त के बीच पंजाब के तीन अंगदाताओं की बदौलत 11 लोगों की जिंदगी में खुशियां लौटी थीं।
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बिहार के गंडा खीरी निवासी 15 साल की बसु को दुर्घटना के बाद गंभीर स्थिति में 15 अगस्त को पीजीआई में भर्ती कराया गया। यहां इलाज के दौरान 21 अगस्त को डॉक्टरों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया। परिजनों से मिली अनुमति के बाद उसका अंगदान कराया गया जिसमें हृदय, लीवर, दोनों किडनी, पैनक्रियाज और दोनों कार्निया प्राप्त किया गया। वहीं पंजाब के एसबीएस नगर निवासी 60 साल के वृद्ध को भी दुर्घटना के बाद पीजीआई में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान उसे भी 22 अगस्त को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। उस अंगदाता के लीवर, दोनों किडनी, पैन्क्रियाज और दोनों कार्निया को प्रत्यारोपित किया गया है। पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल ने अंगदाता परिवार के साहसी निर्णय का सम्मान करते हुए कहा कि उस दुख की घड़ी में दूसरों के लिए सोचने वाले परिजनों ने मिसाल पेश की है। उनका यह निर्णय अजनबियों का जीवन बदल सकता है। आंसू को मुस्कान में बदल सकता है।
इनसेट-
ग्रीन कॉरिडोर ने फिर दिया साथ
अंगदाता बसु के हृदय का मिलान न होने पर उसकी सूचना नोटो को दी गई। इसके बाद तत्काल उसका हृदय दिल्ली भेजने की तैयारी की गई। हर बार की तरह इस बार भी ग्रीन कॉरिडोर ने अहम भूमिका निभाई। 21 अगस्त की रात 8.30 बजे हृदय दिल्ली एयरलिफ्ट किया गया। वहीं दूसरे अंगदाता के लीवर का मिलान न होने पर उसे ग्रीन कॉरिडोर के सहयोग से 23 अगस्त की सुबह 10.45 पर एयरलिफ्ट कर जयपुर भेजा गया।
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कोट
अंगदाता परिवार का निर्णय सम्माननीय व अनुकरणनीय है। परिजनों से अनुमति मिलते ही बिना समय गंवाएं अंगदान की प्रक्रिया शुरू की गई। अंगों का मिलान न होने पर नोटो की मदद से उचित मिलानकर्ता की तलाश पूरी कर उसे ग्रीन कॉरिडोर के जरिए एयरलिफ्ट कराया गया। दोनों ही मामलों में ग्रीन कॉरिडोर में शामिल विभागों का समन्वय और सहयोग सराहनीय रहा।
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-प्रो. विपिन कौशल, चिकित्सा अधीक्षक व रोटो के नोडल अधिकारी पीजीआई
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