फेसबुक पर मिले बिछड़े हुए दो जुड़वां भाई
फेसबुक ने 16 साल से बिछड़े दो जुड़वां भाइयों को मिलवा दिया। इनके मिलन की कहानी इतनी इमोशनल है कि पढ़कर आपका भी दिल भर आएगा। मामला पंजाब के जालंधर का है। एक भाई जालंधर में रहता था और दूसरा लुधियाना में। शिवम ने बताया कि फेसबुक पर खेली जाने वाली एक गेम बाल पूल इसका जरिया बनी।
हुआ यूं कि शिवम गेम खेला रहा था तो हेमंत उस गेम को खेलने वालों के ग्रुप में शामिल हो गया। गेम खेलने के दौरान शिवम ने हेमंत की प्रोफाइल फोटो देखी तो वह हैरान रह गया। वह बिल्कुल उसके जैसा था। एक बार तो उसे गुस्सा आया कि वह उसकी फोटो यूज क्यों कर रहा है? जब शिवम ने हेमंत से पूछा कि उसने कहा कि वह उसकी फोटो क्यों यूज कर रहा है? मामले की गहराई तक पहुंचने के लिए शिवम और हेमंत ने वीडियो कॉल की।
कॉल के दौरान एक दूसरे को देखकर वे हैरान रह गए। दोनों हूबहू एक जैसे थे। तब हेमंत ने उसे बताया कि उसके मां बाप ने उसे गोद लिया था। शिवम ने बताया कि जब उसने अपनी मां शिवानी से इस बारे में पूछा तो उन्होंने सारी कहानी बताई। उसके बाद शिवम ने हेमंत को जालंधर बस स्टैंड बुलाया और मां को लेकर उससे मिलने गया। इस तरह हेमंत और शिवम का मिलन हो गया और एक मां को उसका खोया हुआ बेटा मिल गया।
मां-बाप ने हेमंत को दे दिया था किसी को
फेसबुक पर मिले बिछड़े हुए दो जुड़वां भाई
शिवम ने बताया कि हेमंत से मिलने के बाद उसकी मां शिवानी ने उसके मां-बाप से बात की तो उन्होंने बात को सकारात्मक तरीके से लिया। वे हेमंत को लेकर शिवानी से मिलने आए और उस मुलाकात के दौरान सारी बात खुलकर सामने आई। शिवानी ने बताया कि ये कहानी पंजाब के लुधियाना से शुरू हुई। 14 सितंबर 2001 को तलाकशुदा शिवानी ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया।
वो अकेली दो बच्चों की जिम्मेदारी नहीं उठा पाएंगी, ये सोच उनके माता-पिता ने एक बच्चे हेमंत को जालंधर के अर्जुन शर्मा को दे दिया। एक साल पहले हेमंत को पड़ोसी से पता चला कि वह गोद लिया गया है। इसके बाद वह अपने भाई को तलाशने लगा और इस तरह से मुलाकात हो गई। अब शिवानी और शिवम ने हेमंत को लुधियाना से जालंधर अपने घर बुला लिया।
दोनों परिवारों में काफी बातें सांझा हो गई। अर्जुन को लगने लगा था कि हेमंत अब उनको छोड़कर चला जाएगा, लेकिन हेमंत ने कहा कि वह अपने पिता अर्जुन को छोड़कर नहीं जा सकता। हेमंत का कहना है कि उसको पिता अर्जुन शर्मा और मां अंजलि से इतने संस्कार मिले हैं, वह इनके बिना एक दिन नहीं रह सकता। कहानी थोड़ी सी फिल्मी लगती है न, लेकिन ये सब सच है।