सोची में आयोजित विंटर ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ियों का दल उद्घाटन समारोह में तिरंगे की जगह ओलंपिक के झंडे के साथ उतरा। यह देश के लिए बहुत ही शर्मनाक रहा। इस खबर से देश के खेल प्रेमियों के साथ-साथ भारतीय खिलाड़ियों और पूर्व ओलंपियन के बीच निराशा की लहर दौड़ गई।
गौरतलब है कि ओलंपिक में भारत का निलंबन अभी भी जारी है और इसके चलते भारत को तिरंगे का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं है। सोची ओलंपिक में 3 भारतीय खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। इनमें से अगर कोई खिलाड़ी पदक जीतता है तो राष्ट्र गान की धुन की बजाए ओलंपिक की धुन बजाई जाएगी। पूरा देश इस खबर से निराश है। लंदन ओलंपिक 2012 में ब्रांज मेडल जीतने वाले रेसलर सुशील कुमार भी इस फैसले से स्तब्ध हैं।
उनका कहना है ओलंपिक में हर खिलाड़ी का सपना होता है कि वह अपने देश के झंडे के तले खेले। ऐसे में ओलंपिक में बिना झंडे के हमारे खिलाड़ी कैसे दिखाई देंगे।
कॉमनवेल्थ और एशियन चैंपिनयशिप में गोल्ड मेडल विजेता रेसलर योगेश्वर दत्त को भी इस फैसले से काफी निराशा हुई। वे कहते हैं कि किसी भी इंटरनेशनल इवेंट में भारतीय झंडे के साथ चलने से हर स्पोर्ट्समैन को गर्व महसूस होता है। झंडे के साथ न होने से स्पोर्ट्समैन का हौसला कम हो जाता हैं।
हॉकी के पूर्व ओलंपियन एवं कोच राजिंदर सिंह ने कहा कि यह हमारे लिए काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। ओलंपिक में हमारे खिलाड़ी बिना अपने देश के झंडे के ही दिखाई देंगे।