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80 वर्षीय दिल के मरीज में लगाई ट्रिक वाल्व डिवाइस

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चंडीगढ़। पीजीआई में पहली बार बिना सर्जरी के शहर के एक 80 साल के बुजुर्ग के हृदय के दाईं ओर दो वॉल्व डालकर नया जीवन दिया गया। पीजीआई के कार्डियोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हिमांशु गुप्ता ने बताया कि अब तक हृदय के बाईं ओर बिना सर्जरी के इस प्रकार एंजियोग्राफी की मदद से वॉल्व डालकर मरीजों का इलाज किया जाता था। यह पहली बार है जब इतनी उम्र के बुजुर्ग मरीज के हृदय के दाईं ओर के चैंबर में ट्रिसयुपिड लीकेज हो जाने से हार्ट फेलियर की समस्या को बिना सर्जरी किए ट्रिक नाम के वॉल्व डिवाइस को डालकर बुजुर्ग की जान बचाई गई। अभी तक हृदय के दाईं ओर वॉल्व में लीकेज के दौरान सर्जरी करनी पड़ती थी। इस सर्जरी में मरीज के सीने को चीरकर वॉल्व डाला जाता था लेकिन अब इस डिवाइस से यह जोखिम कम हो गया है।
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डॉ. हिमांशु ने बताया कि इस नई तकनीक के इलाज से मरीज की मृत्यु का जोखिम 80 से 90 फीसदी तक घट गया है। ट्रिक वॉल्व डिवाइस लगने के बाद बुजुर्ग की हालत सामान्य है। यह सारी प्रक्रिया एडवांस कार्डियक सेंटर के प्रमुख प्रो. यशपाल शर्मा के नेतृत्व में की गई। ट्रिक वाल्व सबसे पहले यूरोपियन देशों में लांच हुआ था जो अब भारत में भी उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि हृदय के दाईं और बाईं दोनों ओर दो-दो चैंबर होते हैं। जिस बुजुर्ग मरीज के दाईं ओर के चैंबर में ये दो वॉल्व डाले गए, उनके हृदय के दाईं ओर के दोनों चैंबर में लीकेज हो गई थी। इसकी वजह से हृदय के दाईं ओर का हिस्सा बड़ा हो गया था। ऐसे में उन्हें हार्ट फेलियर से गुजरना पड़ा।
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