पंजाब विधानसभा चुनाव में पहली बार आम आदमी पार्टी ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। वहीं, कई छोटे दल भी इस बार मजबूती से ताल ठोक रहे हैं। सभी की नजरें इस पर लगी हैं कि ये छोटी पार्टियां क्या गुल खिलाएंगी। पंजाब में अभी तक आमने-सामने का मुकाबला परंपरागत प्रतिद्वंद्वियों कांग्रेस और शिअद-भाजपा गठबंधन में होता आया है। पहली बार 2014 के लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) ने दस्तक दी।
अब विधानसभा चुनाव में भी आप मजबूती के साथ इन्हें चुनौती दे रही है। वहीं, आप के ही पूर्व सूबा कन्वीनर और पार्टी को नए सिरे से पंजाब में खड़ा करने वाले सुच्चा सिंह छोटेपुर ने आपणा पंजाब पार्टी बना ली है, जिसने अमृतसर लोकसभा उपचुनाव के साथ-साथ विधानसभा चुनाव में भी 85 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं। पार्टी ने बाकायदा छोटेपुर को सीएम उम्मीदवार भी घोषित किया है।
आप के ही निलंबित सांसद डॉ. धरमवीर गांधी की अगुवाई में सियासी फ्रंट बनाया गया। इस फ्रंट ने भी 25 उम्मीदवार खड़े किए हैं। फ्रंट में शामिल डेमोक्रेटिक स्वराज पार्टी के इनमें से नौ उम्मीदवार हैं। इसी पार्टी के चुनाव चिह्न आरी पर सभी उम्मीदवार लड़ रहे हैं। कांग्रेस से निष्कासित पूर्व सांसद जगमीत बराड़ अब तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं। बसपा सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
टीएमसी ने भी 21 उम्मीदवार उतारे हैं। टीएमसी के ज्यादातर उम्मीदवार मालवा से हैं। वाम दल इस बार पंजाब में मिलकर लड़ रहे हैं, उनका कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं हुआ। वामपंथी पार्टियों ने भी 57 उम्मीदवार उतारे हैं। छोटे दल पिछले विधानसभा चुनाव में भी काफी वोट ले गए थे। सबसे ज्यादा 5.16 प्रतिशत वोट पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब को मिले थे।
बसपा अंबेडकर को .09 प्रतिशत, शिअद-अमृतसर को .28, शिवसेना को .05, लोक जन शक्ति पार्टी को .10, सीपीआई को .82, सीपीएम को .16, बसपा को 4.29 और सीपीआई एमएल लिब्रेशन को 0.10 फीसदी वोट मिले थे।