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अब आपदा के समय भी फर्ज निभाएंगी आईटीबीपी की महिला जवान, दी जाएगी एक महीना ट्रेनिंग

Sat, 29 Aug 2020 11:03 AM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, चंडीगढ़

सार

  • काराकोरम दर्रे से लेकर जाचेप ला तक बॉर्डर पर तैनात है आईटीबीपी
  • आईटीबीपी की बड़ी जिम्मेदारी सरहदों और यहां के लोगों की सुरक्षा हैं
  • एक महीने के प्रशिक्षण के दौरान सीखेंगी कैसे बचानी है लोगों की जान
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आईटीबीपी की महिला जवान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस बल (आईटीबीपी) की महिला जवान अब सरहदों की रक्षा करने के साथ-साथ आपदाओं के वक्त भी अपना फर्ज निभाएंगी। आपदा में फंसे लोगों को कैसे बचाकर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है, ये महिला जवान अब इस काम को भी बखूबी करेंगी। आईटीबीपी को वर्तमान में लद्दाख में काराकोरम दर्रे से लेकर अरुणाचल प्रदेश में जाचेप ला तक बॉर्डर की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है।
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3488 किलीमीटर को कवर करने वाली आईटीबीपी की चौकियां भारत-चीन सीमा के पश्चिमी मध्य में 9 हजार फीट और पूर्वी क्षेत्र में 18700 फीट तक बनी हुई हैं। हालांकि आईटीबीपी की बड़ी जिम्मेदारी सरहदों की सुरक्षा करना हैं। मगर इन पर्वतीय दुर्गम इलाकों में होने वाली प्राकृतिक आपदाओं के समय आईटीबीपी को बचाव के लिए पहली हिफाजती शाखा माना जाता है। इन इलाकों में भूस्खलन, पर्वतों के टूटने, बादलों के फटने के बाद जल प्रलय, बाढ़, भूकंप व हिस्खलन जैसी आपदाएं आती रहती हैं।

इसलिए आईटीबीपी के जवानों को आपदा प्रबंधन के लिए भी तैयार किया जाता है। पर्वतारोहण और स्कीयर में खासे प्रशिक्षित होने की वजह से आपदाओं के समय इन दुर्गम इलाकों में आईटीबीपी के जवान बचाव कार्यों में काफी सहायक होते हैं। इन्हीं हालातों के मद्देनज़र अब आईटीबीपी अपनी महिला जवानों को भी आपदा प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित करेगी। ऐसा पहली बार होगा, जब पुरुष जवानों के साथ-साथ महिला जवानों को भी ये ट्रेनिंग दी जाएगी।
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आईटीबीपी के कुछेक अफसर महिला जवानों को इस तरह की ट्रेनिंग दिलवाने के लिए काफी समय से प्रयासरत थे। अब आईटीबीपी मुख्यालय ने इस संदर्भ में प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए महिला जवानों को भी आपदा प्रबंधन के लिए तैयार करने का फैसला लिया है।
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एक महीने का कोर्स, सीखेंगी कैसे बचानी है जान

आईटीबीपी अफसरों का मानना है कि प्राकृतिक आपदा के समय कई बार बचाव कार्यों के दौरान महिलाओं और छोटे बच्चों को रेस्क्यू करने में थोड़ी दिक्कत आती है। ऐसे में महिला जवानों की कमी खलती है। उनके अनुसार महिला जवानों को डिज़ास्टर्स मैनेजमेंट के लिए तैयार करने की एक वजह यह भी है। एक महीने के प्रशिक्षण के लिए सिलेबस तैयार हो गया है।

पहले बैच में हरियाणा, पंजाब, असम, राजस्थान, बिहार, यूपी, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, वेस्ट बंगाल, मणिपुर, छत्तीसगढ़ व जम्मू एवं कश्मीर की महिला जवानों को चुना गया है। ये महिला जवान तीन हफ्तों में मेडिकल फर्स्ट रिस्पांडर (एमएफआर) और एक हफ्ते कॉलैप्सड स्ट्रेक्चर सर्च एंड रेस्क्यू (सीएसएसआर) की ट्रेनिंग लेंगी। महिला जवानों को ये खास ट्रेनिंग आईटीबीपी के साथ-साथ नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रेनिंग फॉर सर्च, रेस्क्यू एंड डिज़ास्टर्स रिस्पांस (एनआईटीएसआरडीआर) द्वारा दी जाएगी।

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