थियेटर और बॉलीवुड की जानी मानी हस्ती पदमश्री टॉम अल्टर का कहना है कि हार और जीत में मामूली सा फासला होता है। सिर्फ सपनों का पीछा करने वाले ही जिंदगी में जीत का स्वाद चखते हैं।
सचिन तेंदुलकर इसका एक बेहतरीन उदाहरण हैं। वे सेक्टर-25 स्थित चितकारा इंटरनेशनल स्कूल में बच्चों को मोटिवेट करने के लिए आयोजित ‘चेंज द गेम’ सेशन में हिस्सा लेने पहुंचे थे।
उन्होंने करीब एक घंटे तक अपनी जिंदगी से जुड़े पलों को बच्चों के साथ साझा किया। उन्होंने बच्चों से कहा कि वे उस फिल्ड में करियर बनाए जिसमें उनकी दिलचस्पी हो। मेहनत, दृढ़ निश्चय और लगातार कोशिश ही सफलता दिलाती है।
‘शतरंज के खिलाड़ी’, ‘क्रांति’ और ‘परिंदे’ जैसी हिट फिल्मों में अभिनय करने वाले टॉम ने पिछले दो सालों में ‘भेजा फ्राई’ और ‘लाइफ की तो लग गई’ जैसी फिल्मों में अभिनय किया है।
थियेटर, मूवी और लेखन में से अभिनय उनके दिल के करीब है। अब वे एक प्रोजेक्ट ‘एक फुरस्ते गुनाह’ पर काम कर रहे हैं। वे फिल्म निदेशक विशाल भारद्वाज के साथ फिल्म करना चाहते हैं। मशहूर शायर साहिर लुधियानवी उनके अच्छे दोस्त थे।
मोदी, राहुल से बेहतर शीला दीक्षित
बच्चों ने टॉम से फिल्मों से लेकर खेल और राजनीति पर भी सवाल पूछे। बच्चों ने जब उनसे भावी प्रधानमंत्री के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि नरेंद्र मोदी और राहुल दोनों से शीला दीक्षित बेहतर उम्मीदवार हैं।
अंग्रेज पेरेंट्स, फिर भी सीखी हिंदी
टॉम का जन्म 2 जुलाई 1950 में मसूरी में हुआ। अमेरिकन क्रिश्चियन पेरेंट्स होने के बावजूद उन्होंने पढ़ाई हिंदी माध्यम से की और फिर। टॉम बताते हैं कि उनके कैरियर की शुरुआत जगाधरी स्थित सेंट थॉमस स्कूल में स्पोर्ट्स टीचर के तौर पर की थी।
चौथी क्लास से ही रंगमंच में शामिल होने वाले टॉम शकुंतला नाटक में अभिनय किया। उनके मुताबिक साठ के दशक के सुपर स्टार राजेश खन्ना ने उन्हें काफी प्रोत्साहित किया था। क्रिकेट पर कई बेहतरीन लेख के अलावा इनकी ‘लॉगेस्ट रेस’ और ‘द बेस्ट इन वर्ल्ड’ जैसी किताबें भी प्रकाशित हुई हैं।