चंडीगढ़ को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) होने का स्टेटस मिला हुआ। इसके बावजूद शहर में अभी भी खुले में शौच हो रहा है। हालांकि लोगों का कहना है कि पहले से काफी सुधार है। शहर की स्लम कालोनियों के आसपास के एरिया में खुले में शौच हो रहा है जबकि जहां-जहां पर झुग्गी झोपड़ियां का एरिया है, उनके आसपास नगर निगम की ओर से कम्यूनिटी टायलेट बनाए गए हैं। रात के समय घर से दूर होने के कारण इन कम्यूनिटी टायलेट पर जाने से महिलाएं कतराती हैं।
जबकि शहर के मार्केट्स और ग्रीन बेल्ट्स में जो 295 पब्लिक टायलेट्स हैं वह रात 9 बजे के बाद बंद हो जाते हैं। जोकि सुबह 8 बजे तक बंद रहते हैं ऐसे में रात के समय अगर किसी को इनकी जरूरत हो तो उन्हें खुले में ही जाना पड़ता है जबकि सैकड़ों लोग ऐसे हैं जो कि बाजारों के बरामदों और खुले में सोते हैं। इसके साथ ही शहर की अपनी मंडियां और डे मार्केट्स लगती है वहां पर मोबाइल टायलेट की कोई व्यवस्था नहीं है।
सर्वे के दौरान सक्रिय हो जाता है नगर निगम
हर साल मार्च माह में खुले में शौच मुक्त सिटी का खिताब पाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से सर्वे किया जाता है। उस समय नगर निगम की टीमें सक्रिय हो जाती हैं। सुबह सवेरे कर्मचारी ऐसे लोगों को खुले में शौच करने से रोकते हैं जबकि उसके बाद कर्मचारी भी गायब हो जाते हैं। नगर निगम का दावा है कि हर माह 20 से 22 चालान खुले में शौच करने वालों के काटे जाते हैं। एक चालान का जुर्माना 500 रुपये हैं।
घर के लिए पानी भरा जा रहा है टायलेट्स की टंकियों से
सेक्टर-25 में कम्युनिटी टायलेट्स के बाहर जो पानी की टंकियां रखी गई हैं वहां से कई झुग्गी में रहने वाले अपने घर में अन्य काम के लिए पानी प्रयोग करने के लिए पानी भी भर रहे हैं। झुग्गियों में पीने के पानी की कोई सुविधा नहीं है। जबकि सेक्टर-38 वेस्ट शाहपुर में कम्यूनिटी टायलेट के बाहर रखी टंकियों से लावारिस घूम रहे घोड़े पानी भी पी रहे हैं। जिस कारण कई बार टंकियों में पानी भी खत्म हो जाता है। सेक्टर-56 टीन शेड के पास बने टायलेट्स से कुछ टंकियां लीक भी कर रही है। धनास में नदी के पास भी अभी भी खुले में शौच हो रहा है। संजय कालोनी और कालोनी नंबर-4 में अभी भी खुले में शौच हो रहा है जबकि यहां पर पिछले दो साल में काफी सुधार हुआ है।
पार्षद भी मान रहे हैं हो रहा है खुले में शौच
नगर निगम के पार्षद भी मान रहे हैं कि अभी भी खुले में शौच हो रहा है। भाजपा पार्षद एवं वाटर सप्लाई कमेटी के पूर्व चेयरमैन सतीश कैंथ का कहना है कि उनके अपने घर हल्लोमाजरा में कार बाजार के पास अभी भी खुले में शौच हो रहा है। जबकि यहां पर कम्यूनिटी टायलेट्स भी बने हैं। उनका कहना है कि इसके अलावा जिन जिन कालोनियों में सुलभ शौचालय की व्यवस्था है उनकी हालत काफी बदतर है। उनका कहना है कि कई कम्यूनिटी टायलेट्स की टंकियां भी लीक कर रही है। भाजपा पार्षद रवि शर्मा का कहना है कि रात के समय भी शहर के बाजारों में बने पब्लिक टायलेट्स खुलने चाहिए। अब रात के समय जब टायलेट्स ही बंद मिलेंगे तो व्यक्ति कहां जाएगा।
रैन बसेरा बना देते लेकिन टायलेट की कोई व्यवस्था नहीं
प्रशासन की ओर से अगले माह सरदी बढ़ने पर शहर में कई कई पर टैंट लगाकर अस्थायी रैन बसेरा बना दिए जाते हैं। जहां पर बेघर लोग रात के समय सोते हैं। चंडीगढ़ रेजिडेंट्स वेलफेयर फेडरेंशन के अध्यक्ष हितेश पुरी का कहना है कि इन अस्थायी रैन बसेरा के बाहर मोबाइल टायलेट की भी व्यवस्था करनी चाहिए। ऐसे में गंदगी तो प्रशासन खुद ही बढ़वा रहा है।
यहां यहां पर हैं कम्यूनिटी टायलेट
इस समय सेक्टर-25,38 वेस्ट, सेक्टर-56 टीन शेड, आदर्श कालोनी, संजय कालोनी, कालोनी नंबर-4, मनीमाजरा, सेक्टर-44 लेबर चौक के पास कम्यूनिटी टायलेट्स बने हैं। जिन पर नगर निगम का हर माह रखरखाव पर लाखों रुपये खर्च हो रहा है।
बाजारों में जो पब्लिक टायलेट्स हैं उसके लिए प्रयास किया जाएगा कि सुबह सवेरे पांच या छह बजे ही खुल जाएं ताकि जिनके पास घर नहीं हैं वह इसका प्रयोग कर सकें। जिन जिन कालोनियों के पास कम्यूनिटी टायलेट्स में कोई दिक्कत आ रही है उसे दूर किया जाएगा। टंकियों का पानी अगर किसी भी अन्य तरीके से बर्बाद हो रहा है उसे रोका जाएगा।
देवेश मोदगिल, मेयर