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सेल्यूटः वाघा बॉर्डर से मुंबई तक साइकिल पर जाएंगे 3 इंजीनियर, मकसद काफी बड़ा है

Thu, 16 Feb 2017 09:06 AM IST
रमेश शुक्ला 'सफर'/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
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साइकिल पर मुंबई तक के सफर पर निकले तीन इंजीनियर
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जज्बा हो तो इन तीन इंजीनियरों के जैसा। ये तीनों एक ऐसा काम करने जा रहे हैं, जो हर किसी के बस का नहीं और ऐसा करने के पीछे उनका मकसद काफी बड़ा है। जुगल किशोर (67), राजेश शर्मा (48) व राज महात्रे (42) वाघा बार्डर से मुंबई तक का सफर तय करने के लिए साइकिल पर निकले है। वे यह सफर 22 दिन में पूरा करने का लक्ष्य लेकर चले हैं।
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इनका कहना है कि इनके दिल में देश बसता है। हम प्रसिद्धि के लिए नहीं बल्कि देश की कुरीतियों के खिलाफ साइकिल रैली यात्रा पर निकले हैं। हमें देश से प्यार है, इसलिए वेलेंटाइन डे कुछ इस तरह मनाने अटारी बार्डर पर पहुंचे हैं। वे कहते हैं कि ऐसा करने का उनका मकसद यही है कि देश में अमन शांति रहे, भ्रष्टाचार का खात्मा हो और यातायात के नियमों को लोग माने।

देश में नशे का खात्मा हो, बेटी-बेटे समान हो और पर्यावरण बचाया जाए। इन तमाम मुद्दों पर देश को जागरूक करने के लिए हम तीनों ने भारत भ्रमण साइकिल पर करेंगे। शुरूआत वेलेंटाइन डे के दिन अटारी बार्डर से सैनिकों को सैल्यूट करके की है। तीनों मुंबई के रहने वाले हैं और पेशे से इंजीनियर हैं। तीनों रामभक्त हैं। तीनों ने अब संकल्प लिया कि अगले वर्ष वेलेंटाइन डे के दिन करीब सौ लोग मुंबई से अटारी बार्डर तक साइकिल जागरूकता यात्रा निकालेंगे।
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अटारी बॉर्डर से ही सफर शुरू करने के पीछे ये कारण

साइकिल पर मुंबई तक के सफर पर निकले तीन इंजीनियर
अटारी बार्डर से ही साइकिल यात्रा क्यों शुरू की इस पर जुगल किशोर शर्मा कहते हैं कि अमृतसर वीरों-पीरो व गुरुओं की धरती है। पहले श्री हरमंदिर साहिब में देश की उन्नति के लिए अरदास की, फिर जलियांवाला बाग के शहीदों को नमन किया। साइकिल यात्रा अटारी बार्डर से उन सैनिकों को सैल्यूट करके शुरू की जिन सैनिकों की बदौलत देश चैन की नीद सोता है।

जुगल किशोर बताते हैं कि 13 अप्रैल 2016 को उन्होंने जलियांवाला बाग से मुंबई का सफर अपने पोते राहुल के साथ 26 दिनों में तय किया था। इस बार 22 दिनों में करीब 2 हजार किलोमीटर का सफर साइकिल पर तय करेंगे। रोज करीब 90 से 100 किलोमीटर साइकिल चलाएंगे। इसी बीच रास्ते में पड़ते स्कूल-कालेजों में जाकर बच्चों से देश के लिए फौज में भर्ती होने की अपील करने के साथ नशे से दूर रहने की नसीहत भी देंगे।

खास बात है कि इन तीनों इंजीनियर अपनी कंपनी से अवकाश लेकर भारत भ्रमण कर रहे हैं। तीनों सारा खर्च अपने पास के कर रहे हैं। तीनों एक सुर में कहते हैं कि जब भजन गाते हुए हम तीनों साइकिल पर निकलते हैं तो हर राहगीर उन्हें देखता है। हम राहगीर को पम्फलेट बांटते हैं, जिनमें उन्हें देश में फैली कुरीतियों से दूर रहने की अपील करते हैं। हम तीनों का मकसद यही था कि जब देश वेलेंटाइन डे मना रहा हो तो हमें इस दिन कुछ ऐसा करना चाहिए ताकि लोग विदेशी परंपरा को सहेजने के बजाए देश के बारे में सोचे, इस लिए आज का दिन चुना।
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