पंजाब में श्री गुरु नानक देव जी चरणछोह काली बेईं में ऑक्सीजन की कमी से बुधवार को हजारों मछलियां मर गईं। चौथी बार इतनी बड़ी तादाद में मछलियां मरी हैं। इसके लिए साफ पानी की कमी और गंदे पानी का बेईं में लगातार गिरना जिम्मेदार है। पद्मश्री संत बलबीर सिंह सीचेवाल इस बात से चिंतित हैं, वहीं प्रशासन की ओर से बेईं में दूषित पानी गिरने से रोकने के नाकाफी प्रबंधों से नाराज भी हैं। अनुमान है कि करीब 3 क्विंटल मछलियां मरी हैं।
सुल्तानपुर लोधी में निर्मल कुटिया के पास बुधवार सुबह काली बेईं के किनारे मछलियां मरी दिखाई दीं। इसके बाद संत बलबीर सिंह सीचेवाल के सेवादारों ने मछलियों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। मरी हुईं मछलियां बेईं की सतह पर किनारे इकट्ठी हो गईं थी।
संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा कि उन्हें इतने ज्यादा जलचर जीवों के मरने का बेहद दुख है। यह कोई पहली बार नहीं हुआ है बल्कि चौथी बार है। इससे पहले तीन बार ऐसे ही बेईं में मुकेरियां हाईडल से साफ पानी छोड़ने की कमी के चलते मछलियां मर चुकी हैं।
उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले जिला प्रशासन को साफ पानी छोड़ने के लिए बोला गया था तो मुकेरियां हाईडल से 300 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। उसके बाद हाईडल नहर की मरम्मत के कारण पानी नहीं आया। दूसरी तरफ कपूरथला के ट्रीटमेंट प्लांट से अनट्रीट पानी, भुलाणा की कालोनियां का गंदा पानी और सुल्तानपुर लोधी का ट्रीटेड-अनट्रीटेड पानी काली बेईं में गिरने का सिलसिला जारी है। इससे बेईं में ऑक्सीजन का स्तर नीचे चला गया और मछलियां मर गईं।
संत सीचेवाल ने बताया कि वैसाखी से पहले भी डीसी कपूरथला को इस बाबत अवगत करवाया गया था। उन्होंने 50-60 क्यूसेक पानी छोड़ने की व्यवस्था करवाई जोकि कुछ दिन जारी रही। उन्होंने कहा कि यदि बेईं में गंदा पानी न गिरे तो साफ पानी अगर छह माह भी न आए तो ऑक्सीजन का लेवल कम नहीं हो सकता है। जब गंदा पानी लगातार गिरता है तो ऑक्सीजन का स्तर गिरने लगता है। अगले दो-तीन दिन तो मछलियां मरने की तादाद और भी ज्यादा रहेगी।
मछली पालन विभाग कपूरथला के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरिंदरजीत सिंह बावा ने बताया कि उन्होंने मछली पालन अफसर सुल्तानपुर लोधी बलविंदर सिंह के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम जांच के लिए भेज दी है। पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड(पीपीसीबी) की टीम भी वहां पहुंच गई है। मछली पालन अफसर बलविंदर सिंह ने कहा कि प्रारंभिक जांच में मछलियों के मरने का कारण ऑक्सीजन की कमी लग रहा है। पानी के नमूने लेकर लैबोरेटरी में जांच के लिए भेजने की तैयारी की जा रही है।