पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे मोबाइल एप बताएंगे। पंजाब सरकार ने खेतों में पराली जलाने से रोकने के लिए तीन मोबाइल एप जारी किए हैं। ये किसानों को जागरुक करने में काफी मददगार साबित होंगे। इन तीनों मोबाइल एप को पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर की तरफ से तैयार किया गया है। यह जानकारी डीसी प्रदीप अग्रवाल ने दी। उन्होंने बताया कि एक मोबाइल एप ई- खेती मशीन है, इससे किसान पराली को जलाने की जगह खेत में प्रबंध करने संबंधी मशीनों की जानकारी ले सकते है।
ईपी85 एएल पौधे लगाने और उनकी देखभाल संबंधी है, जबकि ई प्रिवेंट पराली को आग लगाने संबंधी तेजी से जानकारी देने के लिए प्रयोग किया जा सकता है। यह तीनों एप इंग्लिश और पंजाबी में जानकारी देते हैं।
20 मिलियन टन पैदा होगी पराली
डीसी प्रदीप अग्रवाल के अनुसार प्रदेश में 65 लाख एकड़ एरिया में धान की फसल को लगाया गया है। इससे 20 मिलियन टन पराली पैदा होगी। इसमें सिर्फ 5 मिलियन टन पराली का प्रबंधन हो पाता है, लगभग 15 मिलियन टन पराली को आग के हवाले कर दिया जाता है। एक टन पराली को आग लगाने से 5.5 किलो नाइट्रोजन, 2.3 किलो फासफोरस, 25 किलो पोटैशियम, 1.2 किलो सल्फर और 400 किलो आर्गेनिक सामग्री को नुकसान पहुंचता है। वही वातावरण को नुकसान पहुंचता है, इससे मनुष्य की सेहत पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए सभी लोगों को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए।