चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने न्यायालय को सारंगपुर स्थानांतरित करने के लिए अपनी प्रस्तावित आम सभा की बैठक और वोटिंग को स्थगित कर दिया है। इमारत से सटी वन भूमि को अनारक्षित करने के संबंध में एक प्रस्ताव तैयार किया है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्यपाल जैन ने इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए हस्तक्षेप किया है।
बार एसोसिएशन विस्तार और स्थानांतरण के बीच निर्णय लेने से पहले केंद्र के जवाब का इंतजार किया जाएगा। बार एसोसिएशन की सचिव गगनदीप जम्मू ने न्यायालय ने बताया कि सेक्टर 1 परिसर चंडीगढ़ के यूनेस्को विश्व धरोहर-घोषित कैपिटल कॉम्प्लेक्स का हिस्सा है, कोर्ट परिसर जगह की भारी कमी को दूर करने के तरीकों पर गहन विचार-विमर्श कियाजा रहा है।
फिलहाल दो मुख्य विकल्पों पर विचार-विमर्श चल रहा था। पहला बार एसोसिएशन हॉल के सामने छह मंजिला इमारत तैयार करना जिसमें तीन बेसमेंट में पार्किंग व तीन मंजिलों पर 16 कोर्ट रूम बनाने की। यह योजना 200 करोड़ की की है। हालाँकि, इस योजना के लिए यूनेस्को की स्वीकृति आवश्यक है। न्यायालय ने हाल ही में रॉक गार्डन से सटी वन भूमि को अनारक्षित करके मौजूदा परिसर में और जगह जोड़ने का सुझाव दिया था। कहा जा रहा है कि इससे न्यायाधीशों और वकीलों, दोनों के लिए पर्याप्त जगह मिल सकती है। दूसरा विकल्प सारंगपुर में 48.8 एकड़ की जगह पर स्थानांतरण का है। वहां 42 लाख वर्ग फुट निर्मित क्षेत्र, 140 कोर्टरूम और आठ प्रवेश-निकास बिंदुओं वाला एक आधुनिक परिसर प्रस्तावित है। हालाँकि, उच्च न्यायालय ने सारंगपुर जाने वाली सड़क पर यातायात की अव्यवस्था को लेकर चिंता व्यक्त की है, जो स्थानांतरण के उद्देश्य को ही कमजोर कर सकती है। मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति रमेश कुमारी की खंडपीठ के समक्ष हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान, इस बात पर ज़ोर दिया गया कि किसी भी स्थानांतरण निर्णय के लिए आम सभा के मतदान के माध्यम से बार की स्वीकृति आवश्यक है।