आप अपना कैरियर रंगमंच में बनाना चाहते हैं तो यहां आपको तरह-तरह के रंग मिल जाएंगे, पहचान मिलेगी पर पैसा नहीं...। जी हां, सिटी के आर्टिस्टों को तैयार करने वाले रंगमंच का हाल ही कुछ ऐसा है।
आर्टिस्ट भी ऐसे हैं जिनमें थिएटर के प्रति पैशन है। यह कहना है सैमुअल जान हों या फिर राजेश कश्यप, संगीता गुप्ता और जगदीश के साथ अनीता शब्दीश और कुलदीप शर्मा जैसे आर्टिस्ट का।
कोई थिएटर को बना बैठा है समाज में संदेश देने का जरिया तो किसी ने थाम लिया स्ट्रीट प्ले का सहारा। उद्देश्य सबका एक समाज को आइना दिखाना।
एक चादर से शुरू होता है मंच
सिटी की थिएटर की दुनिया में एक बड़ा नाम सैमुअल जान का। सैमुअल ने गगन द मामा बाज्यो, पढ़ाई जैसे सीरियल किए हैं।
चंडीगढ़ के सेक्टर-44 में रहने वाले सैमुअल ने बताया थिएटर आर्टिस्ट समाज के ज्यादा करीब होता है। स्कूलों में, कालेजों में, किसानों के घरों में, दलितों के बीच, यूनिवर्सिटी में भी नाटक करते हैं।
सैमुअल जान ने कहा कि यूनिवर्सिटी में बागां द राखा प्ले किया था। उन्होंने बताया कि एक नाटक कृति किया जिसे यू ट्यूब पर डाला गया और उसका जबरदस्त रिस्पांस मिला।
सैमुअल ने कहा कि उनके नाटकों में कालेज के स्टूडेंट्स को भी मौका दिया जाता है और गांव के अच्छे युवाओं को भी।
यह किया काम
मिट्टी-एक्टिंग वर्कशाप
साड्डा हक-एक्टिंग वर्कशॉप
अंधे घोड़े का दान-हीरो
आत्तू खोजी-यू ट्यूब
कृति-किसानों की समस्याओं पर आधारित
कां और चिड़ी-बच्चों का नाटक
शेर और खरगोश-बच्चों का नाटक
मैकबैथ-शेक्सपियर
छिपने से पहले-भगत सिंह की जीवनी
गुजरात के दंगों पर आधारित नाटक
मिट्टी रुदण करें
मिट्टी न होये मतरी
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कैरियर के लिए एक प्ले ही काफी
थिएटर आर्टिस्ट जगदीश ने कहा कि कैरियर के लिए तो एक प्ले ही काफी होता है। थिएटर एक ऐसा स्थान है जिसमें कलाकार का फैसला सीधे जनता करती है।
अगर परफारमेंस की बात करें तो फिल्मों से ज्यादा चैलेंज थिएटर में होता है। इसमें फाइनेंशियल मदद मिलने लगे तो सीधा लाभ होगा। बालीवुड में थिएटर पर्सनलिटी हैं।
उनमें और आम एक्टर के बीच काफी अंतर होता है। यह काम थिएटर का ही होता है। जगदीश के अनुसार, थिएटर के माध्यम से रुपये नहीं कमाए जा सकते हैं पर प्रसिद्ध होने का एकमात्र जरिया थिएटर होते हैं।
यह हैं नाटक
आवारे-भगवती चरण वर्मा की कहानी
श्वेता जीवित है-प्रहलाद यादव की कहानी
मां-नावेल मदर पर आधारित नाटक
अंधा युग-एक्टिंग
राम सजीवन की प्रेम कथा-एक्टिंग
पहचान तो देता है थिएटर
थिएटर आर्टिस्ट और निदेशक राजेश कश्यप ने कहा कि थिएटर का खास मकसद होता है। इसमें रीटेक नहीं होता। कलाकार के लिए यही खास बात है। एक कलाकार को एक एक्ट करने के लिए एक महीने का अभ्यास करना होता है। यदि नहीं करेंगे तो स्टेज पर उस कैरेक्टर में ढल नहीं पाते हैं।
ये किए नाटक
परसाई की दुनिया
अंधा युग
मंदिर
राम सजीवन की प्रेम कथा
स्ट्रीट प्ले
कोट
नार्थ में थिएटर से कैरियर भी बनाया जा सकता है यदि थिएटर के प्ले के दौरान टिकट लगाया जाए। इसका लाभ भविष्य में दिखाई देगा।
कुलदीप शर्मा, डायरेक्टर
चंडीगढ़ टैगोर थिएटर