नुक्कड़ नाटक के जरिये नाट्यशास्त्र के रचे जाने और उसके उद्देश्य के बारे में बताया गया। नाट्य सिर्फ कला नहीं बल्कि हमारे समाज का आईना है। नाट्य सारी कलाओं का सुमेल है, संगम है l नाट्य कला एक अद्भुत कला है। यह हमारे लिए उतनी ही जरूरी है, जितना हमारे जीने के लिए सांस लेना। इसलिए नाट्यशास्त्र को पांचवां वेद भी कहा जाता है।
नाटक में जो हम पाठ सुनते हैं वह ऋग्वेद से लिया गया। संगीत का आधार सामवेद है और यजुर्वेद से अभिनय और अथर्ववेद से रस लिया गया। इन चारों वेदों के अंगों को लेकर नाट्यशास्त्र की उत्पत्ति हुई। नाटक के द्वारा यह भी बताया कि कलाहीन समाज तो पशुओं का समाज होता है l
नाटक में भारत मुनि की भूमिका मनिंदर भट्टी ने निभाई। इसके अलावा हरविंदर सिंह, इशू, अमृतपाल सिंह, रविंदर सिंह, पंकज कुमार, अमनदीप सिंह, गौरव सिंह, खुशविंदर सिंह, गुरप्रीत सिंह, प्रिंस शर्मा, जैकी शर्मा, भूपिंदर कौर ने अभिनय किया।