फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अमर उजाला अभियान से जुड़े युवा, बोले- पटाखों के पैसों से करेंगे जरूरतमंदों के घर रोशन

Wed, 28 Oct 2020 11:36 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
दीपावली पर दीपक जलाने के साथ ही पटाखे चलाने का भी शौक रहता है लेकिन इससे मनुष्य, पशु-पक्षी व पर्यावरण पर काफी विपरीत प्रभाव पड़ता है। ऐसे में कोरोना महामारी ने लोगों को इस पर और गंभीरता से चिंतन करने को मजबूर किया है। इस साल अमर उजाला ने भी ‘एक युद्ध, पटाखों के विरुद्ध’ अभियान शुरू किया है।
विज्ञापन


इस अभियान के तहत बुधवार को शहर के युवाओं से उनके विचार जाने। युवाओं ने कहा कि पटाखों से वायु व ध्वनि प्रदूषण होता है। जिन रुपयों को हम आग लगाते हैं, उनसे किसी जरूरतमंद के घर उजियारा करेंगे तो यही सच्ची दीपावली है। शहर के युवाओं ने संकल्प लिया कि वह स्वयं तो पटाखे चलाएंगे नहीं, साथ ही लोगों को भी इसके लिए जागरूक करेंगे। हर घर रोशन होगा तो कोरोना महामारी जैसी बीमारियों को भी डटकर हराने के हौसला बुलंद होगा।

पर्यावरण बचाएं, पटाखे न जलाएं
आतिशबाजी से पर्यावरण प्रदूषण होता है। बीमारियां फैलती हैं। वायुमंडल के दूषित होने से हर कोई प्रभावित होता है। इसलिए इस बार आतिशबाजी नहीं करेंगे और दूसरे लोगों को भी जागरूक करेंगे कि वह भी पटाखे न जलाएं। रोशनी का त्योहार है दीपक जलाएं। -अनुज सिंह, छात्र पीयू
विज्ञापन


पटाखे न जलाने का लें संकल्प
पिछले साल दिवाली के बाद पटाखों से इतना प्रदूषण फैला था कि लोगों का सांस लेना दूभर हो गया था। यह नौबत इस बार नहीं आए इसलिए सभी लोग पटाखे न जलाने का संकल्प लें। मैं भी आतिशबाजी से दूर रहूंगा और लोगों से भी कहूंगा कि वह भी जागरूक हों। -युवराज, छात्र, पीयू

मरीजों को सांस लेने में होगी परेशानी

- फोटो : अमर उजाला
वाहनों के साथ-साथ इस समय पराली का भी धुआं शहर में आ रहा है। इससे दिवाली पर पटाखे जलाने से प्रदूषण और बढ़ेगा। कोरोना महामारी का भी प्रकोप है। पटाखों के प्रदूषण से मरीजों को भी सांस लेने में परेशानी होगी। इसलिए दिवाली को दीप जलाकर ही मनाएंगे। - कुलदीप सिंह गिल, सेक्टर 21

प्रदूषण हानिकारक, दीपोत्सव से मनाएं दिवाली
दीवाली दीपों का त्योहार है। किसी भी प्रकार का प्रदूषण चाहे वायु प्रदूषण हो या फिर ध्वनि प्रदूषण, कम ही होना चाहिए। प्रदूषण का बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को ज्यादा प्रभाव पड़ता है। इसलिए इस बार की दीपावली केवल दीपोत्सव की तरह होगी। -विनोद वशिष्ट, सेक्टर 22

पर्यावरण व पक्षियों दोनों को खतरा
दिवाली पर हर साल हम हजारों रुपये के पटाखे चलाते हैं। इससे पर्यावरण को तो नुकसान होता ही है, साथ ही पक्षियों को भी समस्या होती है। पटाखों से निकलने वाला धुआं लोगों के लिए समस्या पैदा करता है। इस बार संकल्प लिया है कि अब कभी भी पटाखे नहीं चलाएंगे। दीपक जलाकर इस उत्सव मनाएंगे। -उदय सिंह, छात्र, सेक्टर 35

किसी जरूरतमंद के यहां दिया जलाना ही सार्थक दीपावली

- फोटो : अमर उजाला
हर साल पटाखों पर हजारों रुपये खर्च करते हैं। इस बार तय किया है पटाखों पर खर्च होने वाले रुपयों से किसी जरूरतमंद की मदद करेंगे। असल मे दीपावली का असली महत्व यही है। इससे किसी के आंखों की रोशनी न जाए, बल्कि किसी के घर मे उजियारा हो।- महक सिंह, छात्रा, सेक्टर 40

पटाखे न चलाने का लिया संकल्प, दोस्तों को भी दिलाऊंगा शपथ
मैं इस दीपावली पर संकल्प लेता हूं कि अब पटाखे नहीं जलाऊंगा। अपने दोस्तों से भी संकल्प दिलाऊंगा कि वे भी पटाखे न चलाएं। पटाखों के जहरीले धुएं से न केवल मानव जीवन बल्कि जीव जंतुओं पर भी इसका विपरीत प्रभाव पड़ता है। इन पैसों को किसी बेहतर कार्य मे खर्च करना ही इस बार का उद्देश्य है। - जतिन शर्मा, बीए, अंतिम वर्ष

पांच घरों में जाकर करूंगी जागरूक
मुझे पटाखे जलाने का शौक है, लेकिन इस बार पटाखे नहीं जलाऊंगी। इसके नुकसान के बारे में सभी को जानना बहुत जरूरी है। अपने स्कूल के विद्यार्थियों और अपने परिवार के सदस्यों व रिश्तेदारों को भी पटाखे नहीं जलाने के लिए कहूंगी। अपने पड़ोस के कम से कम पांच घरों को पटाखे न जलाने के लिए निवेदन करूंगी। -भूमि, छात्रा, गवर्नमेंट मॉडल हाईस्कूल, मलोया
विज्ञापन

पशु, पक्षियों और गिलहरियों को होती है दिक्कत

पिछले करीब आठ साल से पटाखे जलाना बंद किया है। वजह यह है कि पटाखों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण से पशु, पक्षियों और खासकर गिलहरियों को अक्सर दिक्कत होती है। ध्वनि होते ही इन्हें छिपने की जगह नहीं मिलती। इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों के आंखो ने जलन होती है। दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करूंगा। -गौरव राजबीर सिंह, सेक्टर-19

पटाखे न बजाने से कोरोना मरीज को भी मिलेगी राहत
ऐसे कई मरीज है, जिनका अभी भी कोरोना का इलाज चल रहा है। कोरोना में लोगों को सांस लेने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में दीपावली पर पटाखे बजाने से बचना चाहिए। पहले ही ध्वनि प्रदूषण का लेवल अक्सर बढ़ा रहता है। पटाखे की वजह निकलने वाली ध्वनि प्रदूषण से पशु पक्षियों को भी दिक्कत है। इस बार का पटाखे नहीं चलाने का संकल्प लिया है। दूसरों को जागरूक करूंगा। -अमित जायसवाल, सेक्टर-28

पिछले 6 साल से नहीं जलाए पटाखे
पिछले 6 साल से मैं पटाखे नहीं जला रहा हूं। लोगों से भी आग्रह करता हूं कि वह पटाखे न जलाएं। मैं एनसीसी फर्स्ट बटालियन नेवल विंग चंडीगढ़ का कैडेट रहा हूं। वर्ष 2014 में एक कार्यक्रम में मैंने पटाखे नहीं जलाने की शपथ ली थी। साथ ही अपनी यूनिट को शपथ दिलवाई थी कि हम पटाखे नहीं जलाएंगे, पर्यावरण को दूषित होने से बचाएंगे। - जीवा राज, महासचिव, आरसीडब्ल्यूए-38 वेस्ट

पटाखें नहीं चलाने के लिए बच्चों को करूंगा जागरूक
मैंने कई साल पहले ही पटाखे जलाने बंद कर दिए थे। इससे वायु प्रदूषण तो होता ही है, ध्वनि प्रदूषण भी होता है। मुझे पटाखे जलाने का कोई फायदा नहीं दिखता। कई बार बच्चे चोटिल हो जाते हैं। इसके सिर्फ नुकसान ही है। मैं इस बार अपने एनजीओ के बच्चों को पटाखे नहीं जलाने के प्रति जागरूक करूंगा। - उपेंद्र मोर्य, प्रेसिडेंट, युवा स्तंभ एनजीओ
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें