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Chandigarh News: किताबों की दुनिया खोलती है ज्ञान और कल्पनाओं की खिड़की

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चंडीगढ़। कई रोचक और समसामयिक साहित्यिक सत्र के साथ चंडीगढ़ लिटरेरी सोसाइटी (सीएलएस) द्वारा आयोजित चंडीगढ़ लिटफेस्ट का रविवार को समापन हो गया। टेलिंग टेल्स, टचिंग लाइव्स सत्र में पुरस्कार विजेता लेखिका शोभा थरूर और लेखिका मोना वर्मा ने सोनिका सेठी के साथ बातचीत की। शोभा थरूर ने कहा कि उनके लेखन की शुरुआत बचपन में शब्दों के प्रति प्रेम से हुई। उस समय मोबाइल या अन्य माध्यम नहीं थे। किताबें हमें दूसरी दुनिया, नई भाषाओं, नए विचारों और कल्पनाशील यात्राओं तक ले जाती है।
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पुरानी यादों को ताजा करते हुए उन्होंने कहा कि तीनों भाई-बहनों को किताबें बहुत पसंद थीं। हम खूब पढ़ते थे। हम आज के वर्डले जैसे शब्दों के खेल खेलते थे। यह सब यहीं से शुरू हुआ। मुझे शब्दों की ध्वनि और संगीत खास तौर पर बहुत पसंद थे। जब कविता की बात आती है तो जरूरी नहीं कि वह तुकबंदी वाला वाक्य हो।’ उन्होंने कहा कि गद्य में भी जब आप कहानी लिखते हैं और अगर आप अपने वाक्यों को जोर से पढ़ते हैं तो शब्दों की लय, सुंदरता और संगीत सुन सकते हैं।
डॉ. सुमिता मिश्रा बोलीं- चंडीगढ़ के पास अब खुद का नेशनल लेवल बुक अवॉर्ड्स
इस अवसर पर बुक बज के अंतर्गत दो पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। साथ ही सीएलएफ लिट्राटी बुक अवॉर्ड्स की शुरुआत भी हुई। चेयरपर्सन सीएलएस एवं फेस्टिवल डायरेक्टर डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि गर्व का पल है कि अब चंडीगढ़ के पास खुद का नेशनल लेवल बुक अवॉर्ड्स है। इससे यह फेस्टिवल एक नेशनल लेवल का लिटरेरी इवेंट बन जाएगा।
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क्रिएटिव राइटिंग वर्कशॉप भी आयोजन हुआ
दूसरे दिन की शुरुआत सोनिका सेठी और देवियाणी सिंह की ओर से आयोजित क्रिएटिव राइटिंग वर्कशॉप से हुई। रूट्स एंड रेसिपीज: ए वेलनेस कन्वर्सेशन सत्र के दौरान भारत की पोषण विशेषज्ञ और जनस्वास्थ्य अधिवक्ता रुजुता दिवेकर ने शिक्षाविद् एवं लेखिका उर्वी शर्मा के साथ बातचीत की। इस मौके पर लाइफ, लव विद अस (लेखिका: सोनिया वशिष्ठ ओबेरॉय) और इकोस ऑफ द सोल (लेखिका: रवी पंधेर) पुस्तक का विमोचन भी किया गया।



शास्त्रीय संगीत और कव्वाली का क्रेज

साज और समा: द आर्ट ऑफ कव्वाली सत्र में शास्त्रीय नृत्यांगना एवं सूफी कथक की रचयिता मंजरी चतुर्वेदी ने कहा कि चाहे शास्त्रीय संगीत हो या शास्त्रीय नृत्य क्रेज कभी कम नहीं होगा। प्रिंस ऑफ कव्वाली के नाम से प्रसिद्ध सूफी गायक ध्रुव सांगरी ने कहा कि कव्वाली सुनने वालों की कमी कभी कम नहीं होगी। इसकी वजह है कि कव्वाली का आनंद अपना ही है।


तीन पुस्तकों को मिला पुरस्कार

सीएलएफ लिटराटी अवॉर्ड सेरेमनी में डॉ. सुमिता मिश्रा और टीम लिट्राटी ने अंग्रेज़ी और हिंदी की फिक्शन एवं नॉन-फिक्शन श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए। अंग्रेजी नॉन-फिक्शन वर्ग में गोपालकृष्ण गांधी की पुस्तक द अंडाइंग लाइट: अ पर्सनल हिस्ट्री ऑफ इंडिपेंडेंट इंडिया और अश्विन सांघी की पुस्तक द अयोध्या अलायंस: भारत कलेक्शन-8 को पुरस्कार मिला। हिंदी वर्ग में बलराम की पुस्तक शुभ दिन को पुरस्कार दिया गया।
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