हरियाणा लोक सेवा आयोग के उप सचिव अनिल नागर के लाखों रुपये की नकदी के साथ गिरफ्तार होने के बाद अब डेंटल सर्जन भर्ती रद्द होने की कगार पर पहुंच गई है। खाली ओएमआर सीट छोड़ने वालों का चयन होने के कारण अब आयोग नए सिरे से यह भर्ती कराने पर विचार कर रहा है। अंतिम निर्णय से पहले आयोग के चेयरमैन प्रदेश के मुख्यसंत्री से मंत्रणा कर रहे हैं। संभावना है कि जल्द ही इस बारे में फैसला लिया जाएगा।
आयोग द्वारा डेंटल सर्जन के 81 पदों की भर्ती का 10 नवंबर को ही परिणाम जारी किया गया है। इसमें उन लोगों का भी चयन किया गया है, जिन्होंने अपनी सीटें खाली छोड़ दी थी। उप सचिव से मिलीभगत के चलते खाली सीटों के नंबर बढ़ाए गए और उनका चयन कराया गया।
आरोपी नवीन और अश्वनी शर्मा ने खुद पूछताछ में इसका खुलासा किया है। विजिलेंस ब्यूरो की टीम ने इस भर्ती से संबंधित रिकॉर्ड भी अपने कब्जे में लिया है, जिसमें छेड़छाड़ करके नंबर बढ़ाए गए हैं। आयोग के कार्यालय समेत अनिल नागर के घर से भी दस्तावेज बरामद किए गए हैं। साथ ही उनके स्टाफ के दो कर्मचारियों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
डेंटल सर्जन भर्ती प्रक्रिया में पैसे लेकर नौकरी देने के मामले खुले तौर पर सामने आने से इस भर्ती के कोई मायने नहीं रह गए हैं। अब आयोग के चेयरमैन इस भर्ती को रद्द करने को लेकर विचार कर रहे हैं। चेयरमैन ने आयोग के तमाम सदस्यों और अधिकारियों के साथ इसपर मंथन भी किया है।
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चेयरमैन, सदस्यों और सचिव नहीं कर पाए निगरानी
आयोग में उप सचिव ही पदों की भर्ती को लेकर पूरा कार्य संभालता है। सचिव और चेयरमैन का कार्य भर्ती प्रक्रिया पर निगरानी का रहता है। इन सभी की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। सवाल ये है कि क्या अकेले उप सचिव ही नौकरियां बांटता था या फिर उनकी किसी और के साथ भी मिलीभगत थी। सीसीटीवी, पुलिस की निगरानी में रहने वाले एचपीएससी दफ्तर के अंदर किस प्रकार से करोड़ों रुपए की न केवल डील होती थी, बल्कि राशि भी खुले आम तरीके से आ जा रही थी।
खाली नहीं छोड़ सकते सीट, इनविलिजिटर भी संदेह के घेरे में
हरियाणा में सरकारी भर्ती परीक्षा में परीक्षार्थी ओएमआर सीट खाली नहीं छोड़ सकते। इसके लिए इनविलिजिटर की ओर से ओएमआर सीट पर मोटे अक्षरों में कैंसिल लिखना होता है। लेकिन डेंटल परीक्षा में ऐसा नहीं हुआ। मिलीभगत के तहत सीटों को कैसिंल नहीं किया गया, बल्कि उनके नंबर बढ़ा दिए गए। विजिलेंस ने जो रिकॉर्ड जुटाया है, उसको खंगाला जा रहा है और वे इनविजिलिटर भी संदेह के घेरे में आ गए हैं, जहां पर खाली सीट छोड़ने वाले परीक्षार्थी बैठे थे।