शिक्षा देने वाले स्कूलों में बच्चों के खान-पान की व्यवस्था को परखा जाएगा। खासकर स्कूलों की कैंटीन किस हालत में चल रही हैं प्रशासन इनका जायजा लेगा। इसके लिए 20 मानक तय किए जा रहे हैं।
20 मानकों पर खरे उतरने वाले स्कूलों को सेफ्टी स्कूल सर्टिफिकेट दिया जाएगा। बाकायदा स्कूल को यह सेफ्टी फूड स्कूल सर्टिफिकेट का लोगो अपने नोटिस बोर्ड पर चस्पाना होगा।
जिससे अभिभावकों को भरोसा होगा कि उनके बच्चे पौष्टिक चीजें ही खा रहे हैं। इन मानकों में जंक फूड की स्थिति, कैंटीन कितनी हाइजेनिक, तली हुई चीजों की उपलब्धता और खाद्य पदार्थों का स्त्रोत आदि शामिल की जा रही हैं।
अभी मानकों की सूची पर मंथन चल रहा है। फूड एंड ड्रग डायरेक्टोरेट इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम देगा। नए सत्र से पहले स्कूलों को सेफ्टी फूड स्कूल सर्टिफिकेट मिलना शुरू हो जाएगा।
बताया यह जा रहा है कि इस परीक्षण से स्कूलों में जंक फूड पर रोक लगाई जाएगी। जंक फूड की आदत विभिन्न तरह की परेशानियों का कारण बनती है। कई स्कूलों में यह कैंटीन कमाई का जरिया होती हैं। घर में रोक-टोक होने के कारण बच्चे जिन चीजों को कम खाते हैं वह चीजें कैंटीन में जमकर खाते हैं। कई बार अभिभावक इस तरह की शिकायत भी करते रहे हैं।
रेस्ट्रां और हाउसवाइफ को भी ट्रेनिंग
स्कूल
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सेफ्टी फूड स्कूल के साथ प्रशासन सेफ्टी फूड रेस्ट्रां और होम पर भी काम करेगा। रेस्ट्रां के पास पहले से ही फूड सेफ्टी लाइसेंस होता है। इसलिए प्रशासन रेस्ट्रां को अलग से सर्टिफिकेट तो नहीं देगा।
लेकिन उसके पूरे स्टाफ को विशेष तरह की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके साथ ही सेफ्टी फूड होम के तहत हाउसवाइफ को भी ट्रेनिंग उपलब्ध करवाई जाएगी। अपनी रूचि अनुसार हाउसवाइफ इस ट्रेनिंग को ज्वाइन कर सकेंगी।
सुरक्षित और पौष्टिक खाद्य सामग्री के लिए प्रशासन सेफ फूड स्कूल, रेस्ट्रां और होम शुरू करने जा रहा है। जिसकेतहत स्कूलों की कैंटीन को विभिन्न मानकों पर परखा जाएगा। मानकों पर खरे उतरने वाले स्कूलों को सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा। इस व्यवस्था को शुरू करने की तैयारियाें पर काम हो रहा है।
अनुराग अग्रवाल, होम कम हेल्थ सेक्रेटरी, चंडीगढ़।