पंजाब कला भवन सेक्टर-16 में गुरशरण सिंह नाटक उत्सव के दौरान नाटक का मंचन करते कलाकार।
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चंडीगढ़। पंजाब कला भवन के सुचेतक रंगमंच की ओर से रंधावा सभागार में शनिवार को 19वां गुरशरण सिंह नाट्य उत्सव का शुभारंभ हुआ। पहले दिन जां पॉल सार्त्रे की लिखी फ्रांसीसी नाटक द रिस्पेक्टबल प्रॉस्टीट्यूट का पंजाबी रूपांतरण ‘कौन जाने साडी पीड़’ का मंचन हुआ। इसमें एक वेश्या का दर्द दिखाया गया। साथ ही यह बताया गया कि पहुंच वाले लोग अपनी गलती को छुपाने के लिए दूसरों को प्रयोग किस प्रकार करते हैं। अनीता शब्दीस के निर्देशित नाटक को पंजाब कला परिषद और संगीत नाटक अकादमी के सहयोग से मंचन हुआ।
नाटक में दिखाया गया कि उच्च जाति के पुरुष अपनी ही जाति की वेश्या से छेड़छाड़ करते हैं। नाटक की कहानी के अनुसार ट्रेन के उस डिब्बे में दो अनुसूचित जाति के लोग भी बैठे हैं जिन्हें पुरुषों का व्यवहार पसंद नहीं है। उनमें से एक गुंडों का विरोध करता है तो उसे गोली मार दी जाती है जबकि दूसरा ट्रेन से कूदकर भाग जाता है। वह हत्या के मामले का एकमात्र गवाह है, लेकिन हत्यारे खुद को बचाने के लिए उस पर झूठा आरोप लगाकर भीड़ से मारवा डालते हैं। इस दौरान एक गरीब आदमी को इस मामले में दोषी ठहराया जाता है और वह वेश्या से खुद को बचाने की गुहार लगता है। दूसरी ओर हत्यारे का कजन रंजीत गरीब आदमी को अदालत में दोषी ठहराने के लिए झूठे बयान पर हस्ताक्षर करने का सौदा करना चाहता है।
जब लवलीन दबाव में झूठे बयान पर हस्ताक्षर करने की अनैतिकता को स्वीकार नहीं करती है तो रंजीत के मेयर पिता अपने चमत्कारी प्रभाव के द्वारा उससे हस्ताक्षर प्राप्त कर लेता है। लवलीन को इसका एहसास होता है, लेकिन खेल हाथ से निकल जाता है और पीड़ा में जलती रहती है। नायिका लवलीन (वेश्या) का रोल पूजा कठवाल बखूबी निभाया। इसमें आठ कलाकारों ने भाग लिया।