डॉक्टरों की ओर से ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद परिजनों से अंगदान की अनुमति मिलने पर बच्ची का हृदय, यकृत, गुर्दा और अग्न्याशय चार मरीजों को प्रत्यारोपित कर दिया गया।
पीजीआई में पांच साल की बच्ची 28 दिसंबर को जिंदगी की जंग हारकर भी चार लोगों को नया जीवन दे गई। डॉक्टरों की ओर से ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद परिजनों से अंगदान की अनुमति मिलने पर बच्ची का हृदय, यकृत, गुर्दा और अग्न्याशय चार मरीजों को प्रत्यारोपित कर दिया गया। पीजीआई में हृदय और यकृत के मिलान का मरीज न मिलने पर उसे मुंबई और दिल्ली के मरीजों की जान बचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाकर भेजा गया।
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दुखी पिता दे गया खुशियां बांटने की सीख
पांच साल की बच्ची को छत से गिरने पर सिर में गंभीर चोट लगने पर सिविल अस्पताल में भर्ती किया गया था, जहां से डॉक्टरों ने पीजीआई रेफर कर दिया। बच्ची एक सप्ताह तक जिंदगी और मौत से जूझती रही। 28 दिसंबर को डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया। पीजीआई रोटो की काउंसलिंग के बाद बच्ची के पिता ने अंगदान का निर्णय लिया। पिता ने कहा कि लोगों के लिए बच्ची और मेरे बारे में जानने से ज्यादा जरूरी है कि अंगदान से चार लोगों की जिंदगी बचाई गई है। ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि जो हमारे साथ हुआ है, वह किसी के साथ न हो। अपने दिल पर पत्थर रखकर बेटी के अंगदान का निर्णय लिया है। अंगदान की अनुमति मिलने पर बच्ची के हृदय को मुंबई और यकृत को दिल्ली के एक-एक मरीज में प्रत्यारोपित किया गया है, जबकि दोनों गुर्दे और अग्न्याशय पीजीआई की प्रतीक्षा सूची में शामिल मरीजों को प्रत्यारोपित किया गया है।
ग्रीन कॉरिडोर बना अंग भेजा बाहर
पीजीआई रोटो के नोडल अधिकारी डॉ. विपिन कौशल ने बताया कि हृदय और यकृत को बाहर भेजने के लिए पीजीआई ने शाम 4.30 बजे दो ग्रीन कॉरिडोर बनाए। हृदय और यकृत को शाम 4.40 बजे एयरपोर्ट से मुंबई और दिल्ली के लिए भेजा गया। इसमें पीजीआई सुरक्षा विभाग के साथ चंडीगढ़ व मोहाली पुलिस के अलावा सीआईएसएफ और हवाई अड्डे के कर्मचारियों का योगदान सराहनीय रहा।
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ढाई साल की बच्ची 6 लोगों की जिंदगी में भर गई थी खुशियां
इससे पहले 22 दिसंबर को मोहाली की रहने वाली ढाई साल की बच्ची अनायिका को भी सड़क दुर्घटना के बाद इलाज के दौरान पीजीआई में ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया था। अनायिका के पिता से अंगदान की अनुमति मिलने पर 6 मरीजों को नया जीवन दिया गया था।
क्या कहते हैं अधिकारी
अपने कलेजे के टुकड़े को खोने के बाद इतना बड़ा निर्णय लेकर परिजनों ने मिसाल कायम की है। उनके निर्णय की बदौलत चार परिवारों की खुशियां लौटी हैं।
-प्रो. सुरजीत सिंह, प्रभारी निदेशक पीजीआई चंडीगढ़