328 पावन स्वरूप गायब मामला: सख्त कार्रवाई की संभावना, एसजीपीसी की भूमिका पर उठ रहे गंभीर सवाल
पंकज शर्मा
अमृतसर। श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 पावन स्वरूपों के गायब होने के मामले में पंजाब सरकार की ओर से गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) से सहयोग नहीं मिल पा रहा है। न तो आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जा रहा है और न ही संबंधित अधिकारी जांच में शामिल हो रहे हैं, जिससे जांच प्रक्रिया गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। एसआईटी ने एसजीपीसी सचिव प्रताप सिंह को सम्मन जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आरोपियों के खिलाफ आंतरिक जांच से संबंधित पूरा रिकॉर्ड एसआईटी को सौंपा जाए और सचिव स्वयं एसआईटी के समक्ष पेश होकर बयान दें। बावजूद इसके न तो रिकॉर्ड उपलब्ध कराया गया और न ही सचिव पेश हुए।
एसआईटी के अधिकारियों का कहना है कि रिकॉर्ड न मिलने के कारण यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि एसजीपीसी ने किन तथ्यों की जांच की, किन कर्मचारियों को दोषी माना और क्या कार्रवाई की गई। इससे न केवल जांच की दिशा प्रभावित हो रही है, बल्कि पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सार्वजनिक एलान और असहयोग
स्थिति और गंभीर तब हुई जब एसजीपीसी के कर्मचारियों ने बैठक कर यह एलान किया कि श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश सर्वोपरि हैं और पुलिस या एसआईटी को किसी भी सहयोग की आवश्यकता नहीं। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी आपराधिक जांच में सहयोग न करना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है। एसआईटी के पास यह अधिकार है कि वह सम्मन अवहेलना और जांच में बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। सूत्रों के मुताबिक यदि एसजीपीसी अधिकारी रिकॉर्ड देने और पेश होने से इन्कार करते रहे, तो एसआईटी उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की सिफारिश कर सकती है।
पंथक भावनाओं से जुड़ा
मामला
यह मामला सिख संगत की भावनाओं से जुड़ा संवेदनशील विषय है। जांच में देरी और असहयोग संदेह और असंतोष को बढ़ा रहे हैं, साथ ही एसजीपीसी की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब सबकी नजर सिट के अगले कदम पर टिकी है, कि क्या जांच एजेंसी जिम्मेदारों को कानून के दायरे में ला पाएगी या नहीं।