पुलिस के मुताबिक अर्जुन ठाकुर एक क्रिकेटर बनना चाहता था, लेकिन पैसों के लालच ने उसे सट्टेबाजों का दरवाजा दिखा दिया। अर्जुन ठाकुर पर पहले भी चंडीगढ़ पुलिस में फिरौती से जुड़े मामले दर्ज है, लेकिन हर बार वह अपने पुलिस एएसआई पिता के कारण बचकर निकल जाता था। चंडीगढ़ के सेक्टर-9, 7 और 26 के कई नाइट क्लब और डिस्कोथेक में क्रिकेट व अन्य खेलों पर बुक चलाता था। वर्ष 2023 में अर्जुन ठाकुर को पुलिस ने एक क्लब संचालक से फिरौती मांगने के मामले में ही गिरफ्तार किया था। इसी साल करीब 8-9 महीने पहले ही बुड़ैल जेल से जमानत पर छूटकर बाहर आया था। उसका लॉरेंस बिश्नोई गैंग के साथ पुराना नाता रहा है।
सट्टे में पैसे हारने पर लॉरेंस गैंग की लेता था मदद
पुलिस की मानें तो अर्जुन ठाकुर सट्टे में जब लाखों रुपये हार जाता था, तब वह गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के गुर्गों को बीच में डालकर सेटलमेंट कराता था। इसकी एवज में आरोपी अर्जुन लॉरेंस के गुर्गों को फिरौती के लिए शहर के नामी क्लब मालिकों के नाम व मोबाइल नंबर उपलब्ध कराता था, ताकि वह आसानी से फिरौती मांग सके। क्योंकि चंडीगढ़ के कई नाइट क्लबों में रोजाना सट्टेबाजों का उठना-बैठना था, जहां आरोपी अर्जुन भी पहुंचता था। इन सब बातों का खुलासा पुलिस रिमांड के दौरान हुआ है।
दो-तीन वर्षों से लॉरेंस के ज्यादा करीब हुआ अर्जुन
अर्जुन की लगातार लॉरेंस गैंग के गुर्गों से बातचीत होती थी, पुलिस की मानें तो वह बीते दो से तीन सालों से गैंगस्टर लॉरेंस, काला जठेड़ी, संपत्त नेहरा और गोल्डी बराड़ के संपर्क में भी था। पुलिस ने अर्जुन का मोबाइल फोन सीएफएसएल जांच के लिए भेजा है, गिरफ्तारी से पहले अर्जुन ने अपने मोबाइल फोन से कई व्हाट्सअप मैसेज और कॉल्स की डिटेल्स डीलिट कर दी है, पुलिस उन कॉल्स को रिकवर करने का प्रयास कर रही है।