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पीयू में डीन संकाय विषय विशेषज्ञ ही होंगे

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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय में आगामी डीन संकाय वही होंगे जो संबंधित संकायों में विशेषज्ञता रखते होंगे। इसका रास्ता चांसलर कार्यालय की ओर से आए पत्र में साफ हो गया है। बनाई गई उच्चस्तरीय कमेटी इसे फाइनल रूप देगी। शिक्षकों का भी यही मानना है कि डीन संकाय जो भी हों वह उस विषयों के विशेषज्ञ होने चाहिए। ऐसा होने से संबंधित विभाग का विकास होता है और नई जानकारियां मिलती हैं।
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पीयू में होते हैं 10 डीन संकाय
पंजाब विश्वविद्यालय में सीनेट के जरिए डीन संकाय का चुनाव होता है। चुनाव में कोई भी व्यक्ति हिस्सा ले सकता है। चाहे वह उस विभाग का विशेषज्ञ हो या नहीं। दस डीन पीयू के विभागों के बनाए जाते हैं, जिसमें कला, इंजीनियरिंग, विज्ञान, मेडिकल साइंस, एनीमल हसबेंड्री, प्रबंधन, लॉ आदि शामिल हैं। एक साल के लिए यह डीन संकाय चुने जाते हैं। विभागों के पाठ्यक्रम से लेकर तमाम कार्य इनके जरिए होते हैं। विभागों का विकास भी इनके जरिए होता है। वर्षों से पीयू में यह व्यवस्था चली आ रही है। शिक्षकों ने बीच में मुद्दा उठाया भी था, लेकिन बात नहीं बन पाई, क्योंकि सीनेट ही इस पर निर्णय लेती है।
चांसलर की चिट्ठी से निकलेगा हल
अब चांसलर कार्यालय से बनाई गई उच्चस्तरीय कमेटी इस पर निर्णय लेगी, क्योंकि वहां से आई चिट्ठी में कहा गया है कि नैक की तरफ से भी डीन संकाय बनाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे कि विशेषज्ञ इसमें कम रहते हैं। इनका भी तर्क यही था कि विशेषज्ञों के आने से विभागों के कार्य और बेहतर होंगे। दूसरे विभागों से या बाहरी व्यक्तियों के आने से उस विभाग की समझ कम हो पाती है। ऐसे में कार्य गति नहीं पकड़ पाता। सूत्रों का कहना है कि उच्चस्तरीय कमेटी भी इसी बात को आगे बढ़ाएगी कि डीन संकाय विशेषज्ञ हों, क्योंकि चांसलर कार्यालय ने इस ओर पूरा इशारा कर दिया है।
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इनसेट--
वर्तमान में डीन संकाय का कार्यभार किसके पास, पता नहीं
डीन संकाय का कार्यकाल 31 जनवरी को पूरा हो गया था। इनका चार्ज किसी अधिकारी को दिया जाना था, लेकिन अब तक कोई निर्णय नहीं हो पाया है। कुछ विभागों का कहना है कि बिना डीन के उनके कार्य प्रभावित होने लगे हैं। हर काम के लिए वह उच्च अधिकारियों के पास नहीं जा सकते। ऐसे अधिकारी को कार्यभार दे दिया जाए ताकि विभाग उनसे संपर्क में रहें। विद्यार्थियों को रिसर्च पूरा करने के लिए समय आदि का आवंटन डीन की ओर से ही किया जाता है जो कार्य कहीं न कहीं प्रभावित हो रहा है। पाठ्यक्रम आदि में बदलाव पर भी विभाग आपस में निर्णय लेने की योजना बना रहे हैं। वह भी बिना डीन के पूरा नहीं हो पा रहा है।
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