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Chandigarh News: मुख्यमंत्री की रैली से मजीठा की राजनीति में हलचल, 11.32 करोड़ की सौगात

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-शिरोमणि अकाली दल के गढ़ में आप’ की सीधी दस्तक
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संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। मजीठा विधानसभा क्षेत्र, जिसे लंबे समय से शिरोमणि अकाली दल का अभेद्य गढ़ माना जाता रहा है, रविवार को सियासी तौर पर नए मोड़ पर नजर आया। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई में आम आदमी पार्टी (आप) की विशाल रैली ने न केवल ताकत का प्रदर्शन किया, बल्कि यह संकेत भी दे दिया कि मजीठा की राजनीति अब पुराने समीकरणों तक सीमित नहीं रहने वाली। इस रैली को अकाली दल के वर्चस्व को सीधी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है, जो वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों को भी प्रभावित कर सकती है।
रैली के दौरान मुख्यमंत्री ने मजीठा क्षेत्र के लिए 11.32 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का शुभारंभ किया। इनमें सड़कों का सुधार, जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना, बुनियादी ढांचा, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े कई प्रोजेक्ट शामिल हैं। इसके साथ ही नए कॉलेज और आधुनिक लाइब्रेरी की घोषणा ने क्षेत्र के युवाओं और विद्यार्थियों में उत्साह भर दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये घोषणाएं केवल विकास का संदेश नहीं देतीं, बल्कि 2027 के चुनावों की रणनीति का अहम हिस्सा भी हैं।
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मजीठा सीट पर पिछले चार चुनावों से मजीठिया परिवार का दबदबा रहा है और यह क्षेत्र अकाली दल की सियासी पहचान का प्रतीक माना जाता रहा है। ऐसे में ‘आप’ की इस रैली में उमड़ी भारी भीड़ को अकाली दल के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। रैली में दिखा जोश यह संकेत देता है कि जमीन पर राजनीतिक हवा में बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं और पारंपरिक समीकरणों में दरार पड़ सकती है।
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मजीठा को वर्षों तक एक परिवार की जागीर बनाकर रखा: मान
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने संबोधन में अकाली दल पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मजीठा को वर्षों तक एक परिवार की जागीर बनाकर रखा गया, जबकि आम जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करती रही। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी राजनीति नहीं, बल्कि काम के आधार पर जनता से समर्थन मांगती है और मजीठा को विकास की नई दिशा दी जाएगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि घोषित विकास प्रोजेक्ट समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतरते हैं तो आप की पकड़ ग्राउंड लेवल पर मजबूत हो सकती है। खासतौर पर युवा, किसान और मध्यम वर्ग वह वर्ग है, जो आने वाले चुनावों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। रैली के बाद मजीठा में सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। जहां अकाली दल के कार्यकर्ता इसे सरकारी ताकत का प्रदर्शन बता रहे हैं, वहीं आम आदमी पार्टी इसे बदलाव की शुरुआत करार दे रही है। इतना तय है कि मुख्यमंत्री की इस रैली ने मजीठा के राजनीतिक समीकरणों को झकझोर दिया है और 2027 से पहले यहां सियासी मुकाबला और तीखा होने के संकेत मिल रहे हैं।
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