सरकार का कहना है कि पूर्व सैनिक अपनी इस मांग के समर्थन में पिछले 45 वर्ष से संघर्षरत हैं। मगर वर्ष 2015 में केंद्र सरकार ने उनकी इस मांग को पूरा कर दिया है। इसके अंतर्गत सभी सैन्य बलों के पूर्व सैनिकों को इसका लाभ दिया जा रहा है। वन रैंक-वन पेंशन के लाभार्थियों की पेंशन भी सातवें वेतनमान के अंतर्गत 2.57 गुना फार्मूले के तहत फिक्स की गई है। इससे भी पूर्व सैनिकों को बड़ा आर्थिक लाभ होगा।
चंडीगढ़ के 7088 पूर्व सैनिकों के लिए 58.69 करोड़
चंडीगढ़ के 7088 पूर्व सैनिकों के लए 58.69 करोड़, हिमाचल प्रदेश के 94709 पूर्व सैनिकों के लिए 414.48 करोड़, दिल्ली के 46626 पूर्व सैनिकों के लिए 445.11 करोड़, जम्मू एवं कश्मीर के 62160 पूर्व सैनिकों के लिए 293.4 करोड़, उत्तराखंड के 116553 पूर्व सैनिकों के लिए 530.57 करोड़, उत्तर प्रदेश के 228326 पूर्व सैनिकों के लिए 1038.23 करोड़, राजस्थान के 110675 पूर्व सैनिकों के लिए 511.62 करोड़, महाराष्ट्र के 130158 पूर्व सैनिकों के लिए 775.47 करोड़ का बजट जारी किया गया है।
केंद्र सरकार ने वन रैंक-वन पेंशन की जो बकाया राशि जारी की है, वह अक्तूबर 2019 तक की है। अब वर्ष 2020 भी खत्म होने वाला है। पूर्व सैनिक सरकार से पूछना चाहते हैं कि शेष बकाया का क्या होगा? कब पूर्व सैनिकों की मांग के अनुसार इसका लाभ मिलेगा। यह पूर्व सैनिकों को गुमराह करने वाली बात है। इसी संबंध में केस सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है। पूर्व सैनिकों को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से ही उम्मीद है। - अतर सिंह मुल्तानी, अध्यक्ष, एक्स सर्विसमैन वेलफेयर कमेटी, हरियाणा।