सीबीआई ने चार मैनपावर कंपनियों के रिकॉर्ड का मूल प्रमाणपत्रों से किया मिलान
जीएमएसएच-16 से चार साल के टेंडरों का ब्योरा मांगा, 350 नर्सों और 12 करोड़ के सिक्योरिटी टेंडर की भी जांच करेगी एजेंसी
संवाद न्यूज एजेंसी
चंडीगढ़। प्रशासन के विभिन्न विभागों में करीब 200 करोड़ रुपये के मैनपावर और सिक्योरिटी टेंडरों में कथित फर्जीवाड़े की जांच सीबीआई ने तेज कर दी है। एफआईआर दर्ज करने से पहले की पड़ताल के तहत जांच एजेंसी ने चार कंपनियों के लैपटॉप और कंप्यूटर से मिले डिजिटल रिकॉर्ड का उपलब्ध मूल अनुभव और परफॉर्मेंस प्रमाणपत्रों से मिलान किया। इसके लिए सीबीआई ने अपने आईटी विशेषज्ञों की मदद ली है। अब एजेंसी ने जीएमएसएच-16 प्रबंधन को पत्र लिखकर पिछले चार साल में इन कंपनियों को आवंटित टेंडरों का ब्योरा मांगा है।
जांच के दायरे में जाहरवीर मैनपावर एंड सिक्योरिटी सर्विस, ए टू जेड मैनपावर एंड सिक्योरिटी सर्विस, नेशनल ग्रुप ऑफ सर्विस और किमसी इंटरप्राइजेज के टेंडर हैं। सीबीआई इन कंपनियों के डिजिटल रिकॉर्ड का सरकारी विभागों में उपलब्ध दस्तावेजों से मिलान करेगी। कंपनियों से संबंधित रिकॉर्ड सीबीआई अदालत में जमा कराए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
एक ही मालिक की दो कंपनियों को नर्सों का टेंडर
शिकायत के मुताबिक, जीएमएसएच-16 में आउटसोर्स पर 350 नर्सों की सेवाओं का टेंडर पहले जाहरवीर कंपनी को दो साल के लिए दिया गया था। इसके बाद नवंबर 2025 में इसी मालिक संदीप मलिक की दूसरी कंपनी ए टू जेड मैनपावर एंड सिक्योरिटी सर्विस को 25.04 करोड़ रुपये सालाना की दर से दो साल के लिए टेंडर आवंटित किया गया। आरोप है कि कंपनियों ने मूल अनुभव और परफॉर्मेंस प्रमाणपत्रों के आधार पर अपनी फर्मों के नाम से प्रमाणपत्र तैयार कर टेंडर हासिल किए। सीबीआई इन आरोपों की जांच कर रही है।
सिक्योरिटी टेंडर भी जांच के घेरे में
सीबीआई जीएमएसएच-16 में करीब 12 करोड़ रुपये के सिक्योरिटी सर्विस टेंडर की भी जानकारी जुटाएगी। शिकायत में आरोप है कि टेंडर आवंटन के समय संबंधित कंपनी के पास चंडीगढ़ का लाइसेंस नहीं था। एजेंसी यह पता लगाएगी कि टेंडर किस आधार पर दिया गया और कंपनियों की पात्रता तय करने के लिए क्या मानदंड अपनाए गए। इसके लिए अस्पताल की आईटी और अकाउंट्स शाखाओं के रिकॉर्ड की जांच की जाएगी।