फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नोट के फेर में दूल्हा-दूल्हन लगा रहे बैंकों के फेरे, शादियों का हुआ बुरा हाल 

Sat, 12 Nov 2016 02:26 PM IST
मोनिल शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
नोट के लिए लाइन में दुल्हा और दुल्हन
विज्ञापन
देव उठनी एकादशी से शादियों का सीजन शुरू हो गया है। इस बीच पांच सौ और हजार रुपये के नोट बंद होने से शादियों वाले घरों में खुशियों के बजाय उदासी है। छोटे और नये नोटों के फेर में दूल्हा-दुल्हन और उनके घर वाले बैंकों के फेरे लगाने को मजबूर हैं। 
विज्ञापन


बारातियों के स्वागत से लेकर नवविवाहितों को शगुन देने के लिए 100-100 रुपये के नोटों की जरूरत जो आन पड़ी है। ऐसे लोगों को बैंकों से निराशा मिली तो मंदिरों के दानपात्रों से पैसे निकालकर जरूरतें पूरी करने की कोशिश कर रहे हैं। 

देव उठनी एकादशी शुक्रवार को जिले में करीब 95 शादियां हुईं। इस दौरान घरातियों और बारातियों को मिलनी से लेकर भात भरने, शगुन और पंडितों को दक्षिणा देने के लिए खासी परेशानी हुई। ऐसे में पंडितों और लड़का-लड़की के परिवारों को शगुन में 500 और 1000 के पुरोन नोट लेने पड़े। कई जगहों पर मिलनी की रस्म में 500 रुपये की जगह 100-50 रुपये के शगुन से काम चलाया गया।
विज्ञापन


शादी समारोह में आए मेहमानों को भी मजबूरन 500 की जगह 151 और 251 रुपये का शगुन डालना पड़ा। दूसरी ओर, जिनके घरों में 13 और 15 नवंबर को शादियां हैं, वे पैसों के लिए बैंकों में परेशान होते दिखाई दिए। खाते से नकदी तय होने की वजह से लोगों को हलवाई, बैंक्वेंट, डीजे आदि के इंतजाम उधार में करने पड़ रहे हैं। अधिकतर बैंकों में बाप-भाई शादी के इंतजाम के लिए प्रबंधकों से मिन्नते करते दिखाई दिए।
विज्ञापन

जानिए क्या कहते हैं लोग

एक हजार का नाोट
17 को बेटी की शादी, हाथ में पैसे नहीं 
मेरी बेटी की शादी 17 नवंबर को है और हाथ में पैसे नहीं हैं। सप्ताह पहले खाते से पैसे निकलवाए थे। सभी नोट 500-1000 के हैं। बेटी को पांच दिन पहले बान पर भी बिठाना है, लेकिन पैसे का इंतजाम नहीं हो पा रहा है। सुबह 11 बजे बेटी के साथ एसबीआई आई थी। दो घंटे बाद भी पैसे निकालने के लिए टोकन नहीं मिला है। मुझे सांस लेने दिक्कत है। घंटों लाइन में खड़े होने से परेशानी हो रही है। - बबीता, लाखनमाजरा

तीन दिन बाद बहन की शादी है, बैंक पैसे नहीं दे रहा 
मैं कोर्ट में टाइपिस्ट का काम करता हूं। तीन दिन बाद 15 नवंबर को सोनीपत में मेरी बहन की शादी है। बारात रोहतक से जाएगी। बड़े नोट बंद हो गए हैं तो पत्नी के साथ ज्वाइंट अकाउंट से पैसे निकालने के लिए आया हूं। बैंक प्रबंधक को शादी का कार्ड दिखाकर मिन्नतें कर ली, लेकिन वे 10 हजार रुपये से ज्यादा पैसे देने को तैयार नहीं हैं। इंतजाम बहुत सारे करने हैं तो कम से कम 50 हजार रुपये चाहिए, लेकिन बैंक ने इतने पैसे देने से मना कर दिया है। - लोकेश एवं मंजू, सिविल रोड

बारातियों के लिए रोटी-आचार और चाय का करेंगे इंतजाम 
मैं फौजी हूं और नागालैंड से बेटी की शादी के लिए छुट्टियां लेकर आया हूं। मेरी बेटी की शादी 13 नवंबर को और भांजी की शादी 26 नवंबर को है। सप्ताह पहले दो लाख रुपये निकाले थे। अब वे सभी कागज के टुकड़े हो गए हैं। बारातियों की मान-तान करनी है, हलवाई को पैसे देने हैं, लेकिन मेरे पास पैसे नहीं है। बैंक मैनेजर से कई बार प्रार्थना कर ली, पर वह भी बेबस हैं। अब तो बारातियों के लिए रोटी-आचार के साथ चाय का इंतजाम करना पड़ेगा। हाथ में पैसे नहीं हैं तो मेहमान का स्वागत तो करना ही है।- महेंद्र सिंह, मकड़ौली कलां।

शगुन में देने हैं खुल्ले पैसे, इसलिए अमृतसर नहीं गया
मेरी ताई की लड़की की 15 नवंबर को अमृतसर में शादी है। मुझे परिवार के साथ 10 नवंबर को जाना था, लेकिन पांच सौ और हजार रुपये के नोट बंद हो गए हैं। नोट बदलवाने के लिए दो दिन से बैंक में आ रहा हूं, क्योंकि आने-जाने के खर्चे के साथ शगुन में भी पैसे देने हैं। शुक्रवार को मेरे दोस्त की बेटी की भी शादी है, उसमें शगुन देना है। इसलिए सुबह 10 बजे बैंक आया, लेकिन ढाई घंटे से टोकन लेने के लिए लाइन में खड़ा हूं।  - श्याम सुंदर, हाउसिंग बोर्ड कालोनी
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें