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अलर्ट : सात साल से खुशहाल पंजाब को पाक में बैठे आतंकी कर रहे बदहाल, मोहाली ब्लास्ट ने खड़े किए कई सवाल

Fri, 13 May 2022 01:45 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मोहाली

सार

थानों से लेकर सरकारी इमारतों को निशाना बनाकर मचा रहे हैं दहशत। पुलिस के खुफिया मुख्यालय पर हुए हमले ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ाई है। अगर इस पर समय रहते काबू नहीं पाया गया तो इसकी चपेट में कई अन्य राज्यों के आने का खतरा भी बढ़ गया है।
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मोहाली ब्लास्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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खुशहाल पंजाब की शांति को दोबारा भंग करने की कोशिशें सरहद पार व विदेशों में बैठे आतंकी सात साल से लगातार कर रहे हैं। एक के बाद एक थानों, सुरक्षा प्रतिष्ठानों व सरकारी इमारतों को निशाना बनाया जा रहा है। 

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उन्हें जब इसमें उस हिसाब से कामयाबी नहीं मिली तो विभिन्न धर्मों से जुड़े लोगों की टारगेट किलिंग करवाकर धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की गई। इस आतंकी खेल में अपने ही देश के युवाओं को गलत राह पर चला दिया। उन्हें मोटी रकम देने से लेकर विदेशों की सैर तक करवाई गई लेकिन अब आग राज्य की राजधानी चंडीगढ़ के पास पहुंच गई है।

आरोपियों के हौसले इतने बुलंद हो गए कि उन्होंने पंजाब पुलिस के खुफिया मुख्यालय को ही निशाना बना दिया। इसने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। अगर इस पर समय रहते काबू नहीं पाया गया तो इसकी चपेट में कई अन्य राज्यों के आने का खतरा भी बढ़ गया है।
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दीनानगर से शुरू हुआ था यह हमलों का खेल
27 जुलाई 2015 से पुलिस थानों व सरकारी इमारतों को निशाना बनाने की आतंकियों ने शुरुआत की। इस दौरान गुरदासपुर स्थित दीनानगर थाने पर हमला हुआ था। तीन पाकिस्तानी आतंकियों ने दीनानगर थाने में घुसकर कब्जा जमा लिया गया था। इस कारण पंजाब पुलिस व विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों ने करीब 12 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आतंकियों को ढेर किया था। इस हमले में कोशिश यही थी कि देश की सुरक्षा घेरे में चूक लगाकर अशांति फैलाई जाए लेकिन वे इसमें सफल नहीं हुए। 

पठानकोट स्थित एयरबेस स्टेशन को भी बनाया निशाना
दीनानगर थाने में आतंकी हमले के करीब पांच महीने बाद जनवरी में पठानकोट एयरबेस स्टेशन को निशाना बनया गया। 2 जनवरी 2016 को तड़के सुबह 3:30 बजे  एयरबेस स्टेशन पर भारी मात्रा में असलहा बारूद से लेस आतंकवादियों ने आक्रमण कर दिया। यह आतंकी रिहायशी एरिया में घुस गए। मुठभेड़ में दो जवान शहीद हो गए जबकि तीन अन्य घायल सिपाहियों ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। सभी आतंकवादी भी मारे गए। यह मामला अभी एनआईए की विशेष अदालत में चल रहा है। एनआईए अपने आरोपपत्र में कह चुकी है कि पाक में बैठे आंतकियों ने साजिश रची थी। पाक में बैठे आरोपियों के रेड कॉर्नर नोटिस जारी हुए लेकिन आरोपी वहां पर अच्छे से जीवन जी रहे हैं।

मकसूदां थाने पर हमले में बदला था ट्रेंड
जालंधर स्थित मकसूदां पुलिस थाने में 14 सितंबर 2018 में हमला हुआ था। यह हमला पूरी रणनीति के साथ हुआ था और पहले हुए हमलों से थोड़ा अलग था। आरोपी फाजिल बशीर पिंकू और शाहिद क्यूम जालंधर के एक कॉलेज में पढ़ते थे। रूफ अहमद मीर और उमर रमजान दोनों निवासी अवंतीपोरा 13 सितंबर 2018 को अवंतीपोरा से जालंधर हमला करने के लिए आए थे। जांच में यह भी पता चला कि फाजिल बशीर पिंकू, शाहिद क्यूम, रूफ अहमद मीर और उमर रमजान उर्फ गाजी ने मकसूदां पुलिस स्टेशन को अमीर नजीर मीर और रसीद अहमद मीर, दोनों निवासी गांव डडसरा, पीएस अवंतीपोरा के साथ निशाना बनाया था। अंसार गजवा-तुल-हिंद संगठन ने यह खेल रचा था। साजिश के तहत फाजिल बशीर और शाहिद क्यूम ने 9 सितंबर 2018 को जालंधर के वेरका प्लांट के पास आतंकी संगठन के एक अज्ञात सदस्य से चार हैंड ग्रेनेड एकत्र किए। उसके बाद 13 सितंबर को रूफ अहमद मीर और उमर रमजान कश्मीर से चंडीगढ़ हवाई जहाज के जरिए पहुंचे। जहां से वह सड़क के रास्ते जालंधर गए। 

लुधियाना में अदालत को बनाया निशाना 
आतंकियों ने पंजाब की आर्थिक राजधानी लुधियाना को भी दहलाने की कोशिश की। दिसंबर 2021 में लुधियाना की अदालत में बम धमाके हुए। इसमें दो लोगों की मौत हो गई और चार लोग जख्मी हो गए थे। यह वारदात विदेश में बैठकर रची गई। इसमें शामिल दो आरोपी विदेश में है। एनआईए द्वारा मामले की जांच की जा रही है। एनआईए ने आरोपियों की सूचना देने वालों को इनाम तक रखा है, लेकिन अभी तक आरोपी पकड़ में नहीं आए हैं।

टारगेट किलिंग में फोन तक नहीं किया प्रयोग
पंजाब में 18 जनवरी 2016 से लेकर 30 अक्तूबर 2017 तक लगातार टारगेट किलिंग का दौर चला। इसमें विभिन्न धर्म के लोगों को निशाना बनाया गया। सात के करीब लोगों की मौत तक हुई। इन वारदातों के हथियार और वारदातों को अंजाम देने वाले आरोपी भी एक-दूसरे को नहीं जानते थे। किसी भी वारदात में प्रयोग फोन का प्रयोग नहीं हुआ। आरोपी वारदातों को अंजाम देने के बाद दुबई समेत कई अरब देशों में घूमे। उन्हें वहां पर किलिंग की ट्रेनिंग तक दी गई। अभी तक ये सारे मामले एनआईए की अदालत में विचाराधीन हैं।

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