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Chandigarh News: शहर में कुत्तों का आतंक, स्वास्थ्य विभाग के पास एंटी रेबीज वैक्सीन ही नहीं

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चंडीगढ़। अगर राह चलते कुत्ता सामने आ जाए तो चुपचाप अपना रास्ता बदल लीजिए। क्योंकि अगर कुत्ते ने आपको काट लिया तो सरकारी अस्पताल में एंटी रेबीज टीका नहीं लग पाएगा। कारण, स्वास्थ्य विभाग के पास एंटी रेबीज वैक्सीन का उपलब्ध न होना है। मनीमाजरा में पिछले 15 दिनों से कुत्ता काटने पर आने वाले लोगों को बिना वैक्सीन लगाए वापस किया जा रहा है। इस संबंध में लोग अस्पताल प्रशासन से शिकायत भी कर रहे हैं लेकिन अस्पताल प्रशासन भी लाचार हैं। क्योंकि मुख्यालय यानी जीएमएसएच 16 के स्तर पर ही वैक्सीन की आपूर्ति ठप है। मनीमाजरा के इमरजेंसी पंजीकरण काउंटर पर ही वैक्सीन खत्म होने की सूचना चस्पा कर दी गई है। जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग एंटी रैबीज वैक्सीन की खरीद नहीं कर रहा। इस कारण यह परेशानी हो रही है। विभाग एंटी रेबीज खरीदने में देरी कर रहा है, लेकिन सीरम की खरीद भरपूर मात्रा में कर ली गई है। जबकि सीरम की जरूरत गंभीर स्थिति वाले मामलों में पड़ती है। सूत्रों का कहना है कि 4 हजार का सीरम (प्रति डोज ) खरीद लिया गया लेकिन 300 की वैक्सीन खत्म होने के बावजूद नहीं खरीदी जा रही है जिससे इसमें कमीशन के खेल की आशंका जाहिर की जा रही है।
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रेबीज क्लीनिक में लग गई अंतिम खुराक
सेक्टर-19 के रेबीज क्लीनिक में बुधवार को टीके का स्टॉक खत्म हो गया है। केंद्र के प्रभारी ने बताया कि स्टॉक 100 पर पहुंचने पर ही इसकी सूचना जीएमएसएच 16 को दे दी जाती है। इस बार भी दी गई थी। उम्मीद है कि वीरवार की सुबह तक आपूर्ति हो जाएगी लेकिन आपूर्ति नहीं हुई तो फिर वीरवार से क्लीनिक में टीका नहीं लगाया जाएगा। जानकारी के अनुसार क्लीनिक में एक दिन 45 नए और पुराने 60 से 70 मरीजाें को एंटी रेबीज लगाया जाता है। ऐसे में टीके की आपूर्ति बंद होने जाने पर काफी संख्या में लोग प्रभावित होंगे।
उधारी से चल रहा था काम
एंटी रैबीज वैक्सीन की कमी को दूर करने के लिए उधारी की रणनीति पर काम किया जा रहा था। सूत्रों के अनुसार पिछले दिनों जब जीएमएसएच 16 में भी स्टॉक खत्म हो गया था। उस स्थिति में सेक्टर-22 के सिविल अस्पताल से उधार लेकर काम चलाया गया था। सेक्टर 22 से मिले वैक्सीन को जीएमएसएच 16 और सेक्टर 45 के सिविल अस्पताल में भेजा गया था। जहां उसका उपयोग किया गया। इन तीनों केंद्रों पर भी स्टॉक लगभग खत्म होने की कगार पर है।
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जनता की किसी को चिंता नहीं, सब कमीशन के पीछे पड़े हैं
स्वास्थ्य विभाग दावे तो तमाम करता है लेकिन हकीकत निराशाजनक है। उन चीजों की जरूरत से ज्यादा खरीद कर ली जाती है जिसमें मोटा कमीशन मिलता है लेकिन जो मरीजों के लिए जरूरी है उसे लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जाती। एंटी रेबीज की कमी इसी का एक उदाहरण है।
-दीपक कुमार, मनीमाजरा
एंटी रेबीज ही नहीं, जो भी जरूरी दवा और अन्य चीजें होती हैं उसकी हमेशा कमी ही रहती है। दलील यह दी जाती है कि मरीज बहुत ज्यादा आ रहे हैं लेकिन यह हकीकत कभी नहीं बयां की जाती कि सरकारी अस्पताल आने वाले मरीजों को कभी भी पूरा इलाज नहीं मिल पाता।
-आशा शर्मा, मनीमाजरा
कोट...
एंटी रैबीज का टीका हर जगह लग रहा है। हमारे पास टीके के साथ सीरम भी उपलब्ध है। चंडीगढ़ के साथ ही पंचकूला और मोहाली के मरीजों को भी टीका लगाया जा रहा है। इससे उसकी खपत बढ़ गई है।
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-डॉ. सुमन सिंह, निदेशक स्वास्थ्य
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