ग्रामीणों में इंदर कुमार, सुरेंद्र कुमार, प्रेम कुमार, रवीश कुमार, अजय कुमार व विक्रम सिंह ने बताया कि आजादी के बाद हर बरसात के मौसम में लोगों को दंश झेलना पड़ता है। जिंदगी कैद होकर रह जाती है। नदी का बहाव अधिक होने से कई बार बीमार लोग समय पर स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिलने से दम तोड़ देते हैं।
लोग लगातार पक्के पुल की मांग कर रहे हैं लेकिन सुनवाई नहीं हुई। हर बरसात के मौसम में नदी से पुल हटा लिए जाने के बाद ग्रामीणों को घरेलू सामान और पशु चारे की किल्लत का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों को अपने दोपहिया वाहन नदी के उस पार ही खड़े करने पड़ते हैं। सरपंच परमजीत कौर ने बताया कि नई नाव के लिए प्रशासन को अवगत करवा दिया गया है।
बैली ब्रिज बनाने के लिए सामान मुहैया करवाया गया था। अब जिला प्रशासन एवं बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) को पुल बनाने की अनुमति मिल गई है। जल्द लोगों को सुविधा मिलेगी। वहीं बीआरओ के अधिकारी महावीर प्रसाद ने बताया कि बैली ब्रिज निर्माण की अनुमति अंतिम चरण में है। उम्मीद है अगले सप्ताह काम शुरू हो जाएगा।
पक्के पुल का निर्माण होने में अभी समय लगेगा। विभागीय प्रक्रिया चल रही है। जोगिंदरपाल, विधायक।