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हिन्दी सीखने की बात आई तो शिक्षकों का दिया तर्क, अभिभावक नहीं चाहते उनका बच्चा हिन्दी पढ़े

Sun, 16 Sep 2018 09:59 AM IST
रूबी सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
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हिंदी दिवस विशेष
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यूं तो भारत की मातृ भाषा हिंदी का जश्न बेहद जोश के साथ मनाया गया, लेकिन जब बात हिंदी को सीखने की आई, तो यहां स्कूल से लेकर कालेज के शिक्षकों ने बच्चों से ज्यादा अभिभावकों के हिंदी के प्रति व्यवहार को लेकर चिंता जताई। इस दौरान तो कइयों ने साफ शब्दों में कहा कि हिंदी स्कूल लेवल पर अभिभावक ही अपने बच्चों को पढ़ाना नहीं चाहते, जो गलत है।
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उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हर मां-बाप अपने बच्चे को हिंदी की बजाय अंग्रेजी मीडियम में पढ़ाना चाहते हैं। इस वजह से बच्चे हिंदी की बजाय अंग्रेजी एवं अन्य भाषा को सीखने में लगे हुए हैं। वे हिंदी को पढ़ाने में अधिक रुचि नहीं लेते हैं। शुक्रवार को हिंदी दिवस पर शहर के शिक्षकों से लेकर डायरेक्टर शिक्षा विभाग ने हिंदी दिवस की सभी को बधाई देते हुए इसे और अधिक विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

हम सभी हिंदी मीडियम में पढ़ते हैं, लेकिन वर्तमान समय में हाल यह है कि मां-बाप अपने बच्चे को हिंदी मीडियम में नहीं पढ़ाना चाहते हैं। वे सिर्फ अंग्रेजी को तवज्जो दे रहे हैं। वे हिंदी के महत्व को नहीं समझ रहे हैं, जिस वजह से हिंदी स्कूली स्तर पर बच्चे हिंदी पढ़ते ही नहीं है। यह गलत है। बच्चों को तो हिंदी से ही शुरूआत करनी चाहिए,  ताकि वे अपने मातृ भाषा को समझ कर ही अन्य भाषा को भी समझे। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से हिंदी को हर स्तर पर प्रमोट करने का सराहनीय प्रयास किया जा रहा है।
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- रुबिंदरजीत सिंह बराड़, निदेशक शिक्षा विभाग चंडीगढ़  

हिंदी का अस्तित्व कभी खत्म नहीं हो सकता है। हां, ग्लोबल लैंग्वेज की वजह से इस पर असर जरूर हुआ है, लेकिन इस भाषा को सीखने एवं चाहने वाले इसे हमेशा अपने स्तर पर प्रमोट कर रहे हैं। हिंदी को शहर में भी हर स्तर पर प्रमोट किया जा रहा है। हमने तो इस साल एमए हिंदी भी शुरू की है। मेरे हिसाब से हिंदी खत्म नहीं हो सकती। एक शिक्षक इसे कभी खत्म नहीं होने देंगे।
- डॉ निशा भार्गव, प्रिंसिपल, एमसीएम डीएवी कालेज सेक्टर-36
 
मेरे हिसाब से हिंदी को स्कूली स्तर पर ज्यादा पढ़ाना चाहिए। मैं अंग्रेजी की शिक्षिका हूं, लेकिन हिंदी हमारी मातृ भाषा है और इसे स्कूली स्तर पर पढ़ाना बेहद जरूरी है, बल्कि इसे 12वीं कक्षा तक सभी को पढ़ाना चाहिए, लेकिन वर्तमान समय में अभिभावक ही बच्चों को हिंदी से दूर कर रहे हैं। वे अपने बच्चों को अंग्रेजी मीडियम में पढ़ाना चाहते हैं। आज हिंदी के संदेश भी अंग्रेजी में लिखे जाते हैं। हमें हिंदी के प्रति पेरेंट्स एवं बच्चों को जागरूक करना चाहिए।
- प्रो. अनीता, अंग्रेजी लेक्चरर, गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-23
 
मैं इतने साल से हिंदी पढ़ा रहा हूं। इसलिए मैंने इसे कम या खत्म होते नहीं पाया है। हालांकि शहर में तो हिंदी के प्रति बहुत जागरूक किया जाता है। बच्चों से लेकर बड़े हिंदी को पढ़ाना एवं सीखना पसंद करते हैं। हां, मेरे हिसाब से हिंदी को यदि अधिक विकसित करना है तो सभी बच्चों को प्राइमरी लेवल पर हिंदी मीडियम ही होना चाहिए।
- राजिंदर कुमार, हिंदी शिक्षक, गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-16

हिंदी एक भाषा या संप्रेषण का साधन मात्र ही नही है, बल्कि भारत को एक सूत्र में बांधने वाली वो भावना हैं जो प्रत्येक भारतवासी में बंधुत्व के भाव को प्रज्वलित करती है। किसी व्यक्ति अथवा समाज का अपनी भाषा से कट जाना उसकी सांस्कृतिक मृत्यु को प्राप्त करने जैसा है। आइए अपने नित्य जीवन में हिंदी के प्रयोग के लिए प्रयास करें।
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- लविश चावला, हिंदी अध्यापक, गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-23ए

 
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